Sulemani Chai – मजलिस में ‘ऑडियो बम’, खामोशी में उठते सवाल

इक्कीस-उन्नीस का खेल और काजिय़ों की कहानी

मजलिस में ‘ऑडियो बम’, खामोशी में उठते सवाल

मजलिस की सियासत इन दिनों एक वायरल ऑडियो को लेकर गरमा गई है। चर्चा है कि एक करीबी, जो खुद को पी.ए. समझने लगे थे.. ने पद दिलाने के नाम पर लेनदेन का खेल रचा। इल्ज़ाम ये भी है कि बिना ऊपर की रज़ामंदी ऐसा मुमकिन नहीं,मगर कुछ लोग ’एआई’ की आड़ लेकर पूरे मामले को झुठलाने में लगे हैं। बुरहानपुर से हैदराबाद तक फैले इस ऑडियो ने अंदरूनी सियासत का परदा हटा दिया है और बड़े जिम्मेदारों की खामोशी सवाल खड़े कर रही है। मामला पुलिस तक पहुंच चुका है, अब सबकी निगाहें कार्रवाई पर टिकी हैं। वहीं जबलपुर की नियुक्ति पर भी कानाफूसी तेज है—बाहरी चेहरा, अंदरूनी सेटिंग की चर्चा। जमीनी कार्यकर्ता खामोश हैं, शायद इसलिए कि यहां मेहनत से ज्यादा मैनेजमेंट की कीमत समझ आ चुकी है। अब देखना यह है कि हैदराबाद इस पर क्या एक्शन लेता हे सवाल पार्टी की इज्जत का है और बी टीम का इल्ज़ाम तो लगता है ही।।

इक्कीस-उन्नीस का खेल और काजिय़ों की कहानी

इंदौर में इन दिनों इक्कीस-उन्नीस का खेल कुछ ज़्यादा ही गरम है। किसी को वक्त से पहले हटाया जा रहा है, तो कोई वक्त के बाद भी कुर्सी नहीं छोड़ रहा। और मामला सीधा कोर्ट पहुंचता है, और फिर शुरू होता है लंबा इंतज़ार। हाल ही में पूर्व हज कमेटी जिला अध्यक्ष कोर्ट पहुंचे, पर अदालत से हाजी जुनेद को राहत मिल गई। अब दोनों तरफ खर्चा भी हुआ और चर्चा भी जमकर हो रही है। शहर में दो-दो काज़ी पहले से मौजूद हैं, जिनका काम निकाह और तलाक तक सीमित माना जाता है।लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं—क्या इसमें भी सियासत घुस आई है?कर्बला से लेकर सीआरपी मस्जिद और वंदेमातरम् तक,हर मुद्दे पर समाज बंटा-बंटा नजर आता है। अब नई चर्चा ये है कि तीसरे काज़ी की भी एंट्री हो सकती है,सुलेमानी चाय के ठियों पर यही गुफ्तगू चल रही है। मसले कम नहीं हो रहे, बस किरदार बढ़ते जा रहे हैं।और समाज वहीं खड़ा है, लोग तमाशा देखते जा रहे हैं।

गाय नहीं, गोबर ही सही.. चुनावी मौसम का नया फ़ॉर्मूला

नगर निगम चुनाव की आहट क्या आई, सलाम-दुआ की स्पीड अचानक बढ़ गई। जो कल तक पहचान में नहीं आते थे,आज हर गली में नेता जी बनकर घूम रहे हैं। कुछ तो वाकई मैदान में उतरने वाले हैं,लेकिन कई ऐसे भी हैं जिन्हें लडऩा नहीं— बस माहौल बनाना है, ताकि रेट सेट हो सके। पिछले चुनाव का किस्सा भी ताज़ा है,खजराने के एक नेता जी ने मौजूदा पार्षद को थसवाया और नेता ने पत्नी को लड़ाने का शोर मचाया, और फिर पारिवारिक कारण बताकर मैदान से हट गए।लेकिन तब तक मोटा माल सेट हो चुका था। अब वही चेहरे फिर एक्टिव हैं,कोरोना काल के राशन किट की पुरानी फोटो झाड़-पोंछकर फेसबुक पर ‘नेकी’ दिखा रहे हैं।मकसद सीधा है… थोड़ा माहौल.. थोड़ा दबाव..और फिर वसूली का खेल। चुनाव आए नहीं, ‘गोबर मॉडल’ पहले ही लागू हो गया!,पूरा मामला खजराने का हे ,बाकी आप पता कीजिए।

मेहबूब कुरैशी
9977862299

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