Big News: भीषण मंदी का दौर शुरू
Recession begins

नई दिल्ली (ब्यूरो)। अगले 15 दिनों बाद देश में भीषण मंदी का दौर शुरू होना तय हो गया है। 15 अप्रैल तक ईरान-अमेरिका युद्ध रुकने के आसार खत्म होने के साथ अब भीषण लड़ाई के आसार बन गए हैं। उधर इसके कारण भारत की विकास दर को भारी नुकसान होना तय है। वहीं तेल कम्पनियों के पास रखा रिजर्व 15 अप्रैल तक खत्म हो जाएगा। इसके बाद तेल कम्पनियों को 115 डॉलर प्रति बैरल कीमत पर कच्चा तेल खरीदना होगा। जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के करीब पहुंच चुका है। तेल कम्पनियां अभी भी 25 से 30 रुपए लीटर का घाटा उठा रही है। देश की 30 प्रतिशत कम्पनियों में काम बंद हो चुका है। छोटे उद्योग अगले 15 दिनों में प्रभावित होने लगेंगे।
माने हुए अर्थशाी और एक्सिस बैंक के चीफ नीलकंठ मिश्रा ने ताजा हालात पर एक रिपोर्ट जारी करते हुए देश में आने वाली भीषण मंदी के पीछे कई कारण गिनाए। उन्होंने जानकारी दी कि रुपए की गिरती कीमत और महंगा कच्चा तेल के कारण देश पर 2 लाख करोड़ से ज्यादा का अतिरिक्त भार पड़ेगा। वहीं भारत से खाड़ी देशों में होने वाला निर्यात प्रभावित हो रहा है। भारत का करीब 10.68 अरब डॉलर का कृषि और डेयरी निर्यात संकट में आ गया है। वहीं 700 करोड़ से ज्यादा के कंटेनरों में रखा सामान भी अब बर्बाद हो चुका है। इसके अलावा छोटे उद्योग, जैसे हैंडीक्राफ्ट, मसाले और अन्य उत्पादों का निर्यात भी प्रभावित हो रहा है। लॉजिस्टिक्स में दिक्कतों और बढ़ती लागत के कारण कई कंटेनर रास्ते में ही फंस गए हैं। निर्यात रुकने के कारण और अमेरिका से टैरिफ समझौता नहीं होने के बाद कई उद्योगों के उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। इसमें पालीमर, सिरेमिक, कारपेट, टैक्सटाइल सहित अनेक उद्योग शामिल है। देश में मंदी की शुरुआत होने का मतलब जहां महंगाई का नया दौर शुरू होता है वहीं रोजगार के अवसर कम होने के साथ ही लोगों के खरीदने की क्षमता भी टूट जाती है और इसका असर कम्पनियों के मुनाफे पर दिखाई देता है। वहीं अब देश में आयात महंगाई को लेकर भी कई आंकलन किए जा रहे हैं। माना जा रहा है खाद्य तेल से लेकर कई और आयातीत सामानों पर इसका असर दिखाई देगा। उल्लेखनीय है कि रेटिंग एजेंसी नोबूरा भी भारत की विकास दर को 2 प्रतिशत तक कम कर चुकी है। Recession begins
कच्चे तेल का 50 साल बाद सबसे गंभीर संकट, आपूर्ति ठप, कीमतों में लंबी उछाल तय
नई दिल्ली। ईरान युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार गहरे संकट में प्रवेश कर चुका है। एस एंड पी ग्लोबल के सीईआरए वीक सम्मेलन में दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों के सीईओ ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से रोजाना 8-10 मिलियन (80-100 करोड़) बैरल तेल और वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत बाजार से बाहर हो गया है। इससे जेट फ्यूल, डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति में भी अभूतपूर्व संकट पैदा हो गया है, जिसकी लहर एशिया से यूरोप तक तेजी से फैल रही है और कीमतों में दीर्घकालिक उछाल अब लगभग तय माना जा रहा है। तेल की कीमतें जल्द ही 125 डॉलर प्रति बैरल के पार होगी।