गुस्ताखी माफ़: आसमान से गिरी गिया, खजूर में अटकी गिया…अब धोती में उलझ गए भिया…नेताओं पर कमान, नया फरमान…
आसमान से गिरी गिया,
खजूर में अटकी गिया…
नगर निगम में अपनी प्रतिभा से अपनी पहचान बनाने वाली निगम आयुक्त रहीं प्रतिभा पाल इन दिनों रीवा कलेक्टर के रूप में अपनी जगह बना चुकी हैं। महापौर सहित एमआईसी के सदस्य, जो लंबे समय से दहेज प्रताड़ना जैसी प्रताड़ना झेल रहे थे, उनकी फाइलें निगम आयुक्त की टेबल पर जाने के बाद वापस नहीं आ पा रही थीं। कुछ एमआईसी सदस्य तो महापौर को बोल चुके थे कि आप से नहीं होता तो हम ही मुख्यमंत्री से बात करते हैं। दो से तीन नाम बलन के हिसाब से दिए गए थे, परंतु मामा ने सब पर दही ढोल दिया। अब पहले नमाज के झगड़े थे, अब तो नई अधिकारी को लेकर रोजे गले हो गए हैं। बताया जा रहा है वे स्पष्टवादी और लाभार्थियों के काम नहीं करेंगी, यानी आसमान से गिरे और खजूर में अटक गए हैं। इधर, यह भी बताया जा रहा है कि गई निगम आयुक्त और आई निगम आयुक्त के बीच मित्रता का व्यवहार भी है, इसलिए चिट्ठों की जानकारी तो मिल ही रही है। दूसरी ओर नई निगम आयुक्त प्रधानमंत्री से भी पुरस्कृत हो चुकी हैं और मुख्यमंत्री के सर्वाधिक विश्वास के अधिकारियों में शामिल हैं। महापौर और एमआईसी सदस्यों की हालत आकाश से गिरे और खजूर में अटके जैसी हो गई है और इसी स्थिति में अब आगे भी संभल-संभलकर कदम रखने होंगे, यानी फैसले तो वही होंगे, जो पहले से होते आ रहे हैं। यानी जंगल पर फिर सिंहनी का कब्जा।
अब धोती में उलझ गए भिया…

इन दिनों कैलाश विजयवर्गीय बोलबच्चन की भूमिका में आ गए हैं। इधर उनका बोलना होता है उधर बच्चन काम पर लग जाते हैं। हालत यह हो गई है कि यदि वे किसी विपक्षी नेता से यह पूछ लें क्या हाल हैं, तो शाम तक हाल-चाल पूछने वालों की भीड़ लग जाती है और हालत यह हो जाती है कि जिससे पूछा है वह तो कुछ नहीं कहता बाकी पूरा गांव बोलने लगता है कि हाल चाल पूछ रहे थे, जैसे हम फकीरी में जी रहे हों। कुछ यही स्थिति पिछले दिनों इंदौर में लड़कियों के कपड़ों पर टिप्पणी के दौरान भी रही। इस दौरान उनके बोले शब्द अर्थ का अनर्थ हो गए, जबकि इन दिनों शहर में बाहर से आकर पढ़ने वाले बच्चों पर नियंत्रण न होने के कारण देर रात सड़कों पर हालत देखी जा सकती है। खासकर विजय नगर चौराहे के आसपास। अब इधर सतना पहुंचे देवर्षी विजयवर्गीय ने यहां जब भाजपा प्रभारी अभयप्रतापसिंह को धोती पहने हुए देखा तो उन्होंने कहा आजकल राजनीति में धोती पहनना मुसीबत है। राजनीति में अब धोती नहीं पहनी जाती, क्योंकि धोती जल्दी खींच ली जाती है। पर सवाल उठ रहा है कि विजयवर्गीय का पजामा कौन खींच रहा है। हालांकि सबको मालूम है, कि कौन-कौन खींच रहा है। दूसरी ओर सूत्र यह बता रहे हैं कि वे अब पजामे का नाडा कस कर बांधकर इस बार मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
नेताओं पर कमान, नया फरमान…

