गुस्ताखी माफ़-सुचिता संस्कार पर साम, दाम वाकई भारी है क्या…चुनाव इवेंट के पर्यटन को लेकर उत्साह…

सुचिता संस्कार पर साम, दाम वाकई भारी है क्या…

इन दिनों खंडवा विधानसभा सीट जहां भाजपा के लिए प्रतिष्ठा बनी हुई है वहीं साम, दाम, दंड, भेद की प्रक्रिया भाजपा के मूल सिद्धांतों यानी सूचिता, संस्कार को दरकिनार कर नए सिद्धांतों के साथ वह मैदान में दिखाई दे रही है। सिद्धांत एक ही चुनाव कैसे जीता जाए। जहां बड़े नेता पिछली बार कांग्रेस से चुनाव जीते सचिन बिरला के भाजपा में शामिल होने पर भरपल्ले कुलांचे मार रहे है तो वहीं जमीनी स्तर पर भाजपा के ही जमीनी कार्यकर्ता इस बात से सख्त रुप से नाराज है। यहां से तीन बार चुनाव जीते हितेन्द्रसिंह सोलंकी भाजपा के ताकतवर नेताओं में माने जाते है। अब सचिन बिरला के आने पर वे दरकिनार हो जाएंगे यह तय दिखाई दे रहा है। जिन क्षेत्रों से गंगा स्नान कर भाजपा में शामिल हुए कांग्रेसी नेताओं ने भाजपा के ही दिग्गज नेताओं का भविष्य संकट में डाल दिया है। वहीं आश्चर्य भाजपा कार्यकर्ताओं को यह भी है कि ज्योति बाबू केवल उन्हीं क्षेत्रों में प्रचार करने जा रहे है जहां कांग्रेस से भाजपा में नेता शामिल हुए है। दूसरी ओर आने वाला समय पूरी तरह चुनावों के लिए ही रहेगा ऐसे में पुराने उपचुनाव में किए गए वादे भी अधूरे ही रहेंगे। नये के लिए तो अभी और इंतजार होगा। ऐसे में भाजपा के एक बड़े नेता का कहना है कि खंडवा चुनाव जीतने के लिए अभी हमें ठाकुरों की नहीं गुर्जरों की जरुरत है। ऐसे में यह दांव देखना पड़ेगा कितना काम आयेगा। वैसे भी यह चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि के आधार पर नहीं बल्कि शिवराजसिंह चौहान की छवि के आधार पर ही हो रहा है। मोदी की छवि पर अब लहर के वोट समाप्त हो गये हैं। हालांकि राजनेता यह भी कहते है कि प्यार में धोखा और चुनाव में किए गए वार कभी भूले नहीं जाते हैं। जख्म रह रहकर आपको याद दिलाता रहता है। देखते है इस चुनाव में सारे खेल के बाद यदि भाजपा का परचम लहराता रहा तो माना जाये की कमलनाथ के भरोसे कमल ही खिलते दिखेंगे।

चुनाव इवेंट के पर्यटन को लेकर उत्साह…
इन दिनों खंडवा चुनाव क्षेत्र में इंदौर के भाजपा के तमाम नेता पर्यटन के साथ चुनावी राजनीति का आनंद भी ले रहे हैं। भाजपा के चुनावी मेनेजमेंट वाले नेता इसे एक इवेंट की तरह लेकर ही चल रहे हैं। जिससे उनका मनोरंजन भी हो रहा है। कोई झूला झूल रहा है तो कोई ढोल बजा रहा है। अब तो यह हद हो गई की करवा चौथ के दिन भी भिया लोगों को यह बताना पड़ रहा है कि वे भाजपा के ऐसे सैनिक है जो मोर्चे पर डटे हुए हैं। जिन क्षेत्रों में डटे हुए हैं उनकी जानकारी अवश्य रखना चाहिए ताकि अगली बार इनको डटाने से पहले अच्छी तरह से जांच कर ली जाए। वह तो गनिमत है कि दीपावली के पहले चुनाव निपट जाएगा वरना दीपावली पर भी सोश्यल मीडिया पर क्या क्या दुखड़े रोये जाते यह दिखने लगता।
और अंत में…
अब आने वाले समय में इंदौर के जिला न्यायालय में प्रकरणों की रफ्तार देखने को मिलेगी। कल जिला जज के साथ हुई जजों की बैठक में इसे लेकर व्यापक चर्चा के बाद सभी जजों को लक्ष्य तय करने के लिए आग्रह किया गया है। यानि आने वाले समय में कोरोनाकाल में खींच रहे प्रकरणों के निपटने की रफ्तार तेजी से दिखाई देगी। हालाकि कुछ न्यायाधीशों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल भी उठे है।
-9826667063

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