750 ऐलान, जमीन पर खरे नहीं उतरे!

आयुष्मान योजना 1 करोड़ ही जुड़े, जीवन ज्योति 10 करोड़ लक्ष्य 25 हजार ही जुड़ेवन ज्योति 10 करोड़ लक्ष्य 25 हजार ही जुड़े

नई दिल्ली (ब्यूरो)। देश में हर तीसरे दिन आम आदमी के लिए कई सुविधाओं और योजनाओं का ऐलान केन्द्र सरकार कर रही है। कुल मिलाकर 7 साल में ढाई हजार से अधिक घोषणाएं की जा चुकी हैं। डिजिटल इंडिया का लाभ लेकर इन योजनाओं को लेकर प्रधानमंत्री को 1 लाख 86 हजार शिकायतें की जा चुकी है, जिन पर कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। योजनाओं की फेहरिस्त में किसानों से लेकर मजदूर और उद्योगपतियों से लेकर छोटे कारखाना संचालकों को भी कई योजनाएं दी गई है। जमीनी आधार पर इन योजनाओं की स्थिति यह है कि इनमें से कई तो केवल घोषणा होकर ही बंद हो गई, जबकि कई योजनाएं केवल सांसें ले रही हैं।
एक निजी न्यूज एजेंसी ने प्रधानमंत्री की घोषणाओं को लेकर सूचना के अधिकार में जो जानकारियां निकाली वह आश्चर्यजनक है। प्रधानमंत्री की सबसे बड़ी आयुष्मान योजना जो 50 करोड़ लोगों तक पहुंचने का ऐलान किया गया था और इसका लक्ष्य भी समय में ही तय होना था। इस योजना में कुल अब तक 1 करोड़ लोग ही जुड़ पाए हैं। उत्तरप्रदेश में मात्र 7 लाख तो बिहार में मात्र 2.90 लाख लोग ही जुड़ पाए। कुल मिलाकर यह योजना अभी तक रफ्तार नहीं ले पाई है, जबकि अगले चुनाव में दो साल ही अब शेष रहेंगे। कुछ यही स्थिति प्रधानमंत्री की उज्जवला योजना की रही। इस योजना में अब तक 8 करोड़ 8 लाख लोग लाभांवित होना थे, योजना की स्थिति यह है कि केवल 3 लाख लोग ही महंगा होने के बाद सिलेंडर ले पाए हैं। बाकि लोग एक बार के बाद वापस आए ही नहीं। तीसरे नंबर पर प्रधानमंत्री की हाऊसिंग योजना में 2022 तक 2 करोड़ 67 लाख मकान दिए जाने थे, दावा यह भी था कि 1 करोड़ 53 लाख घर बन चुके हैं, जबकि अभी तक केवल 45 लाख लोग ही इस योजना का लाभ ले पाए। साल खत्म होने में 3 माह और बाकी है। कुछ यही स्थिति अटल पेंशन योजना की है। 45 करोड़ लोगों को इसका लाभ मिलना था। प्रीमियम देने वालों की संख्या इस योजना में 1 करोड़ 10 लाख है। इसी के अलावा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना में 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को लाभ देने का ऐलान किया गया था, इसमें मात्र 25 हजार लोग ही शामिल हो पाए। वहीं प्रधानमंत्री की घर देने वाले योजना में 22 हजार लोगों की शिकायतें है कि उन्हें दस्तावेज पूरे करने के बाद भी घर नहीं मिले हैं। इसके अलावा 150 योजनाएं ऐसी हैं जो केवल ऐलान होकर ही रह गई हैं।

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