5 साल के कार्यकाल में 4 से तालमेल नहीं बैठा पाए मेयर
अब सिंघल से होगी मित्र की मित्रता!

इंदौर। 17 जुलाई 2022 को जब इंदौर के प्रथम नागरिक के रूप में पुष्यमित्र भार्गव ने शपथ ली थी। तब यही लगा था की कानून के जानकार निगम को व शहर को कानून अनुसार चला लेंगे व अधिकारियों की कमान अपने हाथ में रखेंगे, लेकिन अब जबकि 5 साल का समय बीतने में ज्यादा समय नहीं बचा है व मेयर 2 कमिश्नर के बाद दबी जुबान से ये कहने लगे की अफसरशाही होने लगी है लेकिन अब जबकि उनके सामने 5 वें कमिश्नर आ गए। उसके पहले से कहने लगे की अफसर हमारी सुनते नहीं हैं। अब आमजन का यही प्रश्न है की क्या मित्र की मित्रता नए कमिश्नर से निभ पाएगी या इनको लेकर भी यही कहा जाएगा।
मेयर पुष्यमित्र भार्गव का 41 माह का कार्यकाल हो चुका है व अब उतना समय नहीं बचा है की वो शहर को उनके कार्यकाल को याद करने जैसे काम दे जाएं। जब भार्गव मेयर बने तब प्रतिभा पाल कमिश्नर थी, तभी भाजपा विकास यात्रा निकलना शुरू हुई व उन बैठकों में ये पार्षद ये कहने लगे की अफसर नहीं सुन रहे हैं। शुरुआती दौर में ही ये बात सामने आ गई व पाल व मित्र की अनबन शुरू हो गई। पाल तो कलेक्टर बनकर रवाना हो गई लेकिन उनके बाद हर्षिका सिंह आई। सिंह ने सबसे पहले ही निगम की बैठकों में आ रहे पार्षद पतियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया व बात बिगड़ गई। सिंह के साथ हुई एक अजीबो गरीब घटना ने निगम को ओर चर्चाओं मे ला दिया, जब वर्तमान में मेयर के ओएसडी ने उनकी गाड़ी के आसपास नींबू काटकर ओर दूरियां बनवा दी। फिर आईएएस शिवम वर्मा जब निगम कमिश्नर बनकर आए तो 150 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आ गया तो भोपाल तक चर्चा में रहा। उसके बाद गणेशगंज कांड हो गया, जिसमें भी अफसर-नेता आमने-सामने हो गए। वर्मा के समय भी मेयर का तालमेल नहीं बैठ पाया। उनके ही कार्यकाल के ये खुलकर बोलना शुरू हो गया की अफसर नहीं सुन रहे हैं जिसके कारण शहर में काम नहीं हो पा रहे हैं। वर्मा के बाद दिलीप यादव आयुक्त बनकर आए तो शुरू से ही तालमेल नहीं बैठ पाया। यादव को लेकर निगम गलियारों में चर्चा रही की सीधे भोपाल से आए हैं। यादव ने आते ही राजस्व की फाइलें खोल दी व शहर में सभी वार्डों में सर्वे चालू हो गया। वार्ड 74 में जैसे ही निगम टीम पहुंची वैसे ही बवाल मच गया व निगम अफसर व नेता आमने सामने हो गए। बात थाने से लेकर भोपाल तक पहुंच गई। जैसे तैसे मामला शांत हुआ तो भागीरथ पुरा कांड हो गया, जिसने शहर ही नहीं प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया। बात दिल्ली दरबार तक पहुंची, जिसकी गाज अफसरों पर गिर गई व आयुक्त सहित अनेक अफसर नप गए। यादव सबसे कम समय आयुक्त रहे। अब क्षितिज सिंघल आए हैं, सबकी नजरें इसी बात पर टिकी है कि मेयर पुष्यमित्र भार्गव की मित्रता इनसे कितने समय टिकेगी या इन पर भी यही आरोप लगेंगे की सुन नहीं रहे हैं। इस तरह शहर में निगमायुक्त सहित पांच आईएएस की आमद हुई है। चार आईएएस निगम तो एक आईएएस स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अर्थ जैन हैं। अब महापौर के सामने पांचों आईएएस चुनौती बन जाएंगे।
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