3 करोड़ परिवारों को बचेंगे हर माह 2600 रुपए

नई दिल्ली (ब्यूरो)। एक ओर जहां सरकार आयकर में साढ़े 12 लाख तक छूट देने पर वाह वाही लूट रही है तो दूसरी ओर इस ऐलान से मात्र देश के 3 करोड़ 19 लाख आयकर दाताओं को ही लाभ मिलेगा। उन्हें मात्र हर माह औसत 2600 रुपए की बचत होगी। इससे वे इतने का ही आनंद हर महीने उठा पाएंगे। अभी सरकार लाड़ली बहना और किसान सम्मान निधि में जिस प्रकार राशि दे रही है उसी प्रकार यह राशि भी 3 करोड़ परिवारों को तब तक मिलेगी जब तक वे 7 लाख रुपए से ऊपर के स्लैब में टैक्स भरते रहेंगे।
बजट के बाद अर्थशास्त्रियों द्वारा किए गए अध्ययन के बाद जो आंकलन बताया गया है वह बता रहा है कि अब मध्यमवर्गीय लाड़ला भाई योजना में शामिल होगा। देश में कुल 8 करोड़ 9 लाख लोगों ने आयकर रिटर्न फाइल किया है। इनमें से मात्र 3 करोड़ 19 लाख लोग ही ऐसे हैं जो 7 लाख रुपए से ज्यादा टैक्स देते हैं। इन आयकर दाताओं के टैक्स छूट मिलने के कारण एक लाख करोड़ का सरकार को नुकसान बताया गया है। इसकी गणना के अनुसार प्रत्येक परिवार को यानी 3 करोड़ 19 लाख लोगों को 2612 रुपए का हर महीने लाभ मिलेगा। यह देश की कुल आबादी का ढ़ाई प्रतिशत भी नहीं है। यानी एक मध्यमवर्गीय परिवार इस राशि से महीने में एक बार फिल्म देखने का शोक पूरा कर सकता है या फिर किसी होटल में परिवार के साथ थोड़े पैसे ओर मिलाकर खाना खा सकता है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार कुल मिलाकर यह योजना भी किसान सम्मान निधि और लाड़ली बहना जैसी ही रहेगी। इधर दूसरी ओर गोल्ड लोन को लेकर जो आंकड़े जारी किए गए हैं वह बता रहे हैं कि इस समय 15 लाख करोड़ से अधिक का सोना मध्यमवर्गीय परिवारों के घर से निकालकर बैंकों और साहूकारों के यहां गिरवी रखा जा चुका है। देश में इस समय 165 लाख करोड़ के कर्ज उठाए जा चुके हैं। यानी सोना गिरवी रखकर कर्ज उठाने वालों का आंकड़ा 12 प्रतिशत के लगभग पहुंच गया है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि देश की कुल आबादी 140 करोड़ है। इसमें केवल आयकर छूट देना 3 करोड़ लोगों के लिए उचित नहीं है, जबकि सरकार खुद ही यह कह रही है कि इस समय देश में विकास की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है और खपत 61 प्रतिशत तक पहुंच गई है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार को आयकर के बजाय जीएसटी में बड़ी छूट देना थी, इसका लाभ हर परिवार तक पहुंचता। महंगाई के दौर में जीएसटी के कारण हर परिवार की जेब से सामान्य स्थिति में भी 1000 रुपए से ज्यादा की राशि टैक्स के रूप में जा रही है।
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