गुरुसिंघ सभा: इस बार प्रतिष्ठा की लड़ाई में तीन पैनल मैदान में होगी

रिंकू भाटिया के साथियों ने साथ छोड़ा, मोनू भाटिया और बाबी छाबड़ा में समझौता

indore sikh samaj

इंदौर।
गुरुसिंघ सभा के चुनाव को लेकर अब मैदानी $लड़ाई शुरु होने जा रही है। इस बार का चुनाव पूर्व अध्यक्ष रिंकू भाटिया के लिए भी आसान नहीं होगा। भाटिया पिछले आठ साल से यहां पर काबिज है और लंबे समय से चुनाव भी नहीं करवा रहे हैं। इस बार भारी दबाव के चलते गुरुसिंघ सभा के चुनाव मार्च या अप्रैल में कराये जाने हैं। इस बार रिंकू भाटिया की पैनल के अलावा दो और पैनल भी मैदान में होगी। इसमे रिंकू भाटिया के पुराने साथी मोनू भाटिया और जसबीर गांधी भी अलग अलग पैनल लड़वाने जा रहे हैं। सिख समाज के ही दूसरे ताकतवर नेता और खालसा कॉलेज ट्रस्ट के सर्वेसर्वा बाबी छाबड़ा यहां मैदान में नहीं है वे मोनू भाटिया के साथ समझौता कर चुके है। ५० साल पुरानी संस्था के चुनाव इस बार बड़े रोचक होंगे।

गुरुसिंघ सभा में शराब कारोबारी रिंकू भाटिया के पिछले दिनों शराब मामले में ही गिरफ्तारी के बाद लंबे समय जेल मेें रहने के कारण गुरुसिंघ सभा के कई सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। अब यह माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में यहां चुनाव होना तय है। इस बार तीन पैनल मैदान में दिखाई दे रही है। खुद रिंकू भाटिया को उनके पुराने साथी छोड़ चुके है इस बार उन्हें उम्मीदवारों का टोटा है। वे नये उम्मीदवारों को साथ में लेकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। तो दूसरी ओर उनके ही पुराने साथी जसवीर गांधी, दानवीर छाबड़ा और रुपल नई पैनल बनाकर इस बार मैदान में उतर रहे हैं। जसवीर गांधी के कार्यकाल को लेकर काफी विवाद रहे हैं। कमलनाथ को आमंत्रित कर सिरोपा भेंट करने वाले मामले में उन्हें सार्वजनिक रुप से माफी तक मांगना पड़ी थी। तो दूसरी ओर सिंधी समाज से गुरुग्रंथ गुरुद्वारों में वापस करने को लेकर वे सबसे ज्यादा विवादों में आ चुके हैं।

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सिंधी समाज ने अपने यहां मंदिरों से गुरुग्रंथ ले जाकर गुरुद्वारों में रखवा दिये थे। कहा जा रहा था कि उनके मंदिरों में गुरुग्रंथ साहब का कोई सम्मान नहीं हो रहा है। इस मामले में अकाल तख्त ने भी जसबीर गांधी को तलब किया है और पूछा है कि किसके कहने से उन्होंने यह निर्णय लिया था। इसलिए यह चुनाव उनके लिए आसान नहीं होगा। दूसरी ओर रिंकू भाटिया और स्वर्गीय गुरदीपसिंह भाटिया के बीच खालसा कॉलेज ट्रस्ट को लेकर लंबा विवाद चला था जो अभी तक जारी है। तीसरी ओर सिख समाज के स्थापित ताकतवर समाजसेवी मोनू भाटिया भी पैनल उतार रहे है जो ताकतवर मानी जा रही है।

हालांकि मोनू भाटिया पर भी कुछ आरोप लग रहे हैं। इसे खालसा कॉलेज ट्रस्ट के सर्वेसर्वा बाबी छाबड़ा का भी समर्थन है। मोनू भाटिया और बाबी छाबड़ा में जो समझौता हुआ है उसके तहत बाबी छाबड़ा खालसा कॉलेज और मोनू भाटिया गुरुसिंघ सभा तक सीमित रहे हैं। एक दूसरे के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। मोनू भाटिया की टीम में रमेश मेंदोला के खास सिपेहसालार हरप्रित बक्षी, कांग्रेस के ताकतवर नेता मंजीतसिंह टूटेजा के अलावा जयवंतसिंह छाबड़ा, अमरप्रितसिंह बग्गा, मनप्रीत भाटिया मैदान में होंगे।

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