Sulemani Chai: भोपाल के खाते में अल्पसंख्यक कांग्रेस..! बुरहानपुर आओगे तो अंडे-टमाटर खाओगे…!

भोपाल के खाते में अल्पसंख्यक कांग्रेस..!
साहब, लंबे अरसे से खाली पड़ी प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस की कुर्सी पर अब ताजपोशी की सुगबुगाहट तेज है। इमरान प्रतापगढ़ी के दरबार में आवेदन और निवेदन की फाइलें पहुंच चुकी हैं। मंथन के बाद चार-पांच नाम बचे हैं, जिनमें विधायक आतिफ अकील और भोपाल के ही नासिर साहब भी अपनी-अपनी गोटियां बिठाए बैठे हैं। इंदौर से भी एक नाम उछल रहा है, मगर उसकी कतार इतनी पीछे है कि फिलहाल नाम लेना भी जल्दबाजी होगी। वैसे जनाब की पहचान और अपने ही पार्टी के नेताओं से अदावत के किस्से सियासी गलियारों में चर्चा का विषय रहते हैं। साथ ही साहब तथ्यों के साथ सत्तापक्ष को कठघरे में खड़ा करने में माहिर हे ,अब उन्हें कांग्रेस का महफूज पठान कहें या सियासत का अलग ही नमूना, फैसला आप खुद कर लीजिए! फिलहाल सवाल यही है कि प्रदेश की कुर्सी का फैसला पूरे प्रदेश को देखकर होगा या फिर भोपाल के खाते में ही सियासी मलाई जाएगी? इंदौर वाले तो बस इंतजार में हैं कि उनके हिस्से में कुर्सी आएगी या फिर एक बार फिर सिर्फ दिलासा! नाम अब भी समझ नहीं आया? तो सुलेमानी नंबर घुमाइए, साहब! चाय की चुस्की के साथ नाम भी खुलेगा और सियासत का हिसाब भी।
बुरहानपुर आओगे तो अंडे-टमाटर खाओगे…!
साहब, भोपाल में बैठकर बुरहानपुर की सियासी सवारी के सपने देख रहे एआईएमआईएम के प्रदेश मुखिया मोहसिन अली को शायद लगा था कि वहां पहुंचते ही स्वागत में फूल बरसेंगे और सियासी जमीन बिछ जाएगी। लेकिन जनाब, बुरहानपुरियों ने तो पूरा रायता ही फैला दिया! नारे लगे, पुतला जला और भीड़ से आवाज आई—अबकी बार आएगा तो अंडे-टमाटर खाएंगा! लगता है भाईजान को बिरयानी का न्योता समझकर जाना महंगा पड़ गया। नए-नवेले दूल्हे राजा के अरमानों पर ऐसी सियासी बारिश हुई कि भोपाल से बुरहानपुर तक का हिसाब गड़बड़ा गया। अब जनाब की निगाहें फिर भोपाल उत्तर की तरफ घूम रही हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में क्या सियासी गणित बैठा था, किससे क्या तालमेल हुआ था और किसकी किससे पटरी बैठी थी, यह तो भोपाली चच्चा ही बेहतर जानते होंगे। भैया, हम भी क्यों किसी के ऐब खोले पहले ही हमारी सुलेमानी चाय का स्वाद लोगो का हाजमा खराब कर देता है! हम तो बस इतना कहेंगे कि समझ लीजिए—बुरहानपुर में अंडे-टमाटर का डर और भोपाल में सियासी जोड़-तोड़ की आस मोहसिन अली को नई, गली दे सकती हे अरे ,,नई गली बोला कुछ और न पढऩा।
आईके से निकला तीसरा डॉक्टर महंगी फीस वालों के लिए आईना..!
साहब, शहर की सबसे पुरानी मुस्लिम एजुकेशनल सोसायटी के सबसे कम फीस वाले आईके बॉयज स्कूल ने एक बार फिर कमाल कर दिखाया! महज 5 हजार रुपए सालाना फीस वाले इस स्कूल से अब्दुल अहद अंसारी को इंडेक्स मेडिकल कॉलेज, नोमान खान को एमजीएम मेडिकल कॉलेज और मोहम्मद आदिल को एलएनसीटी मेडिकल कॉलेज में सीट मिली है। यानी एक ही सत्र में एक स्कूल से तीन डॉक्टर बनने की राह खुल गई। यह कामयाबी उन लोगों के लिए तमाचा नहीं तो और क्या है, जो महंगी फीस को बेहतर तालीम की गारंटी समझते हैं? इन बच्चों ने साबित कर दिया कि कामयाबी फीस के भारी-भरकम बिल से नहीं, बल्कि लगन, मेहनत और शिक्षकों की ईमानदार कोशिशों से मिलती है। जिसके लिए हर उस्ताद सुलेमानी सलाम का हकदार है, लेकिन असली सवाल तो अब उठता है साहब! सोसायटी के दूसरे स्कूलों की फीस जब इससे कहीं ज्यादा है, तो वहां से ऐसी कामयाबी की खबरें क्यों नहीं आ रहीं? आखिर कम फीस वाला आईके बॉयज तीन-तीन बच्चों को मेडिकल की राह दिखा रहा है, तो महंगी फीस वाले स्कूलों के नतीजों पर सवाल क्यों न उठें? सोसायटी के जिम्मेदारों को इस सवाल का जवाब जरूर तलाशना चाहिए।
खजराने में कांग्रेस के सामने कांग्रेस…
हम बात कर रहे हे खजराने के जो कि शहर के मुस्लिम क्षेत्रों में अपने आप में अलबेला लेकिन मजेदार इलाका हे, यहां भीड़ में फेका गया हर दूसरा पत्थर भावी पार्षद को लगता है अब हम बात करे वार्ड 39, की जहां कांग्रेस की लुटिया डुबोने में खुद कांग्रेस ही लगी हुई हे यह विपक्ष तो है ही नहीं,, रुबीना मेडम ,,की लुटिया डूबेगी तो वो कांग्रेसी तपेले में ही डूबेगी ,अलबत्ता कांग्रेस से सभी को पार्षद की सवारी शुरू हो चुकी है जिनमें पहले सलीम कबाड़ी है जो पिछला चुनाव लड़ कर थोड़े मजबूत हुवे थे कैसे वो आप समझो, पार्टी ने उन्हें अल्पसंख्यक कांग्रेस में पद भी दिया था दूसरे अख्तर नेता जो लक्की गौरी के समय 140,वोट लाकर कचरे करा बैठे थे। इस बार भी सवारी तो हे ही,सूत्रों की माने तो साहब ने 38, का टिकट भी नौशाद खान टेंट वाले को दिलाने का वादा भी कर दिया हे लगता है। बापड़े की दुकान बंद करा कर ही मानेंगे,तीसरा नाम सदफ ( बुग्गा)पठान का है जो कि बस ठीक है। ज्यादा क्या बोले, सबसे मजबूत है वाहिद अली जो कि इकबाल खान एंड कंपनी को मामू बनाने का दम रखते हैें। कुल जमा खर्च साहब वार्ड 39, में अब तक बीजेपी से किसी की भी चर्चा नहीं इसी के साथ कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने वालो को ही कांग्रेस पदों से नवाज रही है। तो साहब लगता है।इस बार भी वहां कांग्रेस वर्सेस कांग्रेस ही होगी।
दुमछल्ला… नमाजिय़ों की घड़ी सुस्त है…
खबर गुंजी थी कि समाज सेवी फैसल इब्राहीम को सम्मान मिला है। देश की कई मस्जिदों में उन्होंने नमाज़ का समय बताने वाली कई गाडिय़ा लगवाई है। फैसल साहब ने ये काम करके अपनी घड़ी को तो दुरुस्त कर लिया। लेकिन मस्जिद में आ रहे नमाजिय़ों की घड़ी सुस्त पड़ी है। नया दौर है ,,,नया तौर है । घडिय़ों के पुराने कारीगर अपना असर खो रहे हैं। अब फैसला होना ज़रूरी है कि किस टेक्निक से नमाजिय़ों की घडिय़ां सुधारी जाए। इनकी घड़ी सुधरेगी तो समाज की बिगड़ी घड़ी भी सही समय दिखाने लगेगी।
मेहबूब कुरैशी
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