नीतीश कुमार होंगे महागठबंधन के मुख्यमंत्री

6 करोड़ और मंत्री पद का ऑफर दिया था विधायकों को

पटना। अंतत: बिहार में भाजपा की तोड़फोड़ की सियासत काम नहीं आ पाई। भाजपा की ओर से जदयू के विधायकों को 6 करोड़ और मंत्री पद का ऑफर दिया था। यह दावा जदयू के ही विधायकों का है। दूसरी ओर अब नीतीश कुमार भाजपा से अलग होकर महागठबंधन के साथ सरकार बनाएंगे।
आज सुबह से जदयू के विधायकों और सांसदों की बैठक नीतीश कुमार के यहां और महागठबंधन की बैठक राबड़ी देवी के निवास पर जारी थी। बताया जा रहा है कि पिछले माह ही नीतीश कुमार को भनक मिल गई थी कि जदयू के विधायकों को मंत्री पद के साथ भाजपा करोड़ों रुपये देने का दाव खेल रही है। इसके बाद ही नीतीश कुमार ने भाजपा के कार्यक्रमों से अपनी दूरी बना ली थी। इस बीच उन्होंने नई रणनीति भी तैयार करना शुरू कर दिया था। जदयू में तोड़फोड़ का सारा खेल गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चल रहा था।

महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में भी राजनीतिक सियासत गरमाने लगी है। जदयू और भाजपा का गठबंधन टूट की कगार पर पहुंच गया है। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के घर जदयू के 21 सांसदों और 45 विधायकों की बैठक शुरू हो गई है। उधर तेजस्वी यादव ने गृह मंत्रालय की मांग की है। गृहमंत्री अमित शाह की नीतीश कुमार से हुई फोन पर चर्चा के बाद अब नया घटनाक्रम जल्द ही बदलेगा।
बिहार में तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भाजपा-जदयू गठबंधन पर संकट के बादल मंडराने लगें हैं। वहीं, राजद और जदयू में नजदीकी भी बढ़ती दिख रही है। जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद गहमागहमी काफी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द नए गठबंधन के साथ नई सरकार बनने की संभावना दिख रही है, परंतु अभी तक नीतीश कुमार की तरफ से किसी भी प्रकार के संकेत नहीं मिले हैं।

नीतीश के करीबी सांसद के मुताबिक इस आशंका के पर्याप्त कारण हैं। आरसीपी को नीतीश की सहमति के बिना मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। आरसीपी भाजपा के उस शीर्ष नेता के करीबी हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को सत्ता से बेदखल करने की पटकथा लिखी। उन्हीं के इशारे पर आरपीसी ने गुपचुप तरीके से राज्यसभा चुनाव के दौरान जदयू विधायकों की बैठक बुलाई। अब वही आरसीपी नया दल बनाने में जुटे हैं और उनका लक्ष्य हर हाल में जदयू और खास कर नीतीश कुमार को कमजोर करना है। आरपी सिंह के माध्यम से जदयू में बड़ी तोड़फोड़ की तैयारी के संकेत नीतीश कुमार को पिछले माह मिल चुके थे और उसके बाद ही उन्होंने भाजपा के कार्यक्रमों से दूरी बना ली थी। इधर आरपी सिंह लगातार गृह मंत्री अमित शाह के संपर्क में बने हुए थे। दूसरी ओर महागठबंधन की बैठक में विधायकों से समर्थन के पत्र भी लिए जा रहे हैं।

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