श्रीलंका के बाद अब मालद्वीव लाओस भी कर्ज के जाल में डूबे

पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल के पास विदेशी मुद्रा भंडार एक माह का बचा

वॉशिंगटन (बीबीसी)। श्रीलंका की तरह ही एशिया के चार और देश बड़े आर्थिक संकट में उलझ गए हैं। श्रीलंका इस समय भीषण महंगाई और सामान की कमी से संघर्ष कर ही रहा है कि इस बीच पाकिस्तान, मालदीव, लाओस और बांग्लादेश, नेपाल भी अपने यहां विदेशी मुद्रा भंडार के बेहद कम हो जाने के कारण आयात पर बड़े प्रतिबंध लगाने के साथ विदेश यात्राओं पर भी रोक लगा चुका है।

इन देशों में एक बात सभी जगह समान है कि सभी चीन द्वारा उनके देश में किए गए बड़े निवेश में उलझ गए हैं। मालदीव पर जीडीपी का 100 प्रतिशत कर्ज हो गया है और वह भी विदेशी कर्ज में डिफाल्टर बन चुका है। चीन कई देशों में बड़ी तेजी से निवेश कर अपना जाल कस रहा है। भारत की कई कंपनियों और योजनाओं में चीन का बड़ा निवेश है।

देशों को आर्थिक सहायता देने वाली एजेंसी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मॉनिटरिंग फंड विभाग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में एशिया के देशों को लेकर कई जानकारी जारी करते हुए बताया है कि जहां श्रीलंका को आईएमएफ का पैकेज अभी तक नहीं मिला है और इसके कारण श्रीलंका में भीषण महंगाई चरम पर पहुंच चुकी है। इसके साथ खाने-पीने के सामान का संकट भी खड़ा हो गया है। इसी के साथ पाकिस्तान को अभी पैकेज जारी नहीं हुआ है। परंतु यहां पर भी चार सप्ताह का ही विदेशी मुद्रा भंडार शेष है। 

पाकिस्तानी रुपया लगातार गिरकर डॉलर के मुकाबले 245 रुपए तक पहुंच गया है। तीसरी ओर मालदीव पर भी जीडीपी का 100 प्रतिशत कर्ज होने के साथ वह डिफाल्टर हो गया है। बांग्लादेश में महंगाई 8 माह के उच्च स्तर पर पहुंची है, परंतु यहां अभी विदेशी मुद्रा भंडार ठीक स्थिति में है, तो वहीं लाओस पर चीन का भारी कर्ज हो चुका है। चीन ने यहां कई बड़ी योजनाओं में अपना निवेश लगा रखा था। लाओस पर 16 अरब डॉलर का चीनी कर्ज है और अब उसके पास भी केवल एक माह का ही विदेशी मुद्रा भंडार शेष है। नेपाल अपने यहां पहले से ही आयात पर कई प्रतिबंध लगा चुका है।

वहीं भारत को लेकर अभी कोई रिपोर्ट जारी नहीं की है, परंतु दूसरी ओर देश के अर्थशास्त्रीय मान रहे हैं कि आने वाले समय में भारत श्रीलंका तो नहीं बनेगा परंतु भारत बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। भारत पर 200 लाख करोड़ का कर्ज हो चुका है जो जीडीपी का 90 प्रतिशत है। वहीं कई राज्य बुरी तरह से कर्ज के जाल में उलझने के बाद नए कर्ज उठाने के लिए सरकारी संपत्तियां गिरवी रख रहे हैं। वित्त सचिवों की बैठक में भी इसका जिक्र किया गया था। रिजर्व बैंक ने भी अपने बैंकों को पत्र लिखकर 10 प्रदेशों को कर्ज देने से बचने की सलाह देते हुए कर्ज पूरी तरह जांचने के बाद देने के निर्देश दिए हैं।

चीनी निवेश ही इन देशों की बर्बादी का कारण बना

आईएमएफ की रिपोर्ट में कहा गया है छोटे देशों सहित कई देशों में चीन बड़ी योजनाओं पर सरकार को कर्ज दे रहा है। श्रीलंका के हम्मनटोटा बंदरगाह 99 साल की लीज पर चीन के पास जा चुका है। चीन के कर्ज में वह डिफाल्ट हो गया है तो वहीं लाओस और मालदीव भी चीन के कर्ज में डूब गए हैं। नेपाल ने चीन से कर्ज लेने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान पर 25 प्रतिशत से ज्यादा चीन का कर्ज है। इसके बदले में चीन 99 साल की लीज पर यहां बड़ी संपत्ति ले चुका है। भारत में भी अब मोबाइल बाजार पूरी तरह चीन के कब्जे में है। तो वहीं भारत पर भी चीन का बड़ा निवेश हो चुका है। भारत पर 2 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज है। इसके अलावा कई कंपनियों में भी चीन का पैसा लग चुका है।

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