डॉलर के मुकाबले रूबल ने भारी उछाल बनाई

रूस के वित्त मंत्री ने डूब रहे रूबल को रणनीति से ताकत दी, इधर रुपया लगातार हो रहा है धड़ाम

मास्को (एजेन्सी)। रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद अमेरिका ने रूस पर 6 हजार से ज्यादा आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे, साथ ही रूस के कच्चे तेल ओर प्राकृतिक गैस पर प्रतिबंध लगा दिए थे। वहीं रूस की करंसी रूबल को तोड़ने के लिए नाटो देशों में रूबल पर प्रतिबंध लगाकर अमेरिकी बैंकों में जमा रूस का खजाना भी जब्त कर लिया था। इधर रूस ने बडी रणनीतिक लड़ाई लड़कर तमाम प्रतिबंधों के बाद भी कारोबार के नए क्षेत्र खोल कर अमेरिका को करारा तमाचा मारा है। प्रतिबंधों के कारण रूबल कि कीमत डॉलर के मुकाबले 135 रूबल तक चली गई थी। कल रूबल ने एक बार फिर वापसी करते हुए डॉलर के मुकाबले 55 रूबल तक अपनी ताकत खड़ी कर दी। दूसरी ओर भारत का रूपया एशिया की सबसे घटिया करंसी में शामिल हो गया है। आज रुपया डालर के मुकाबले 78 रुपए 20 पैसें को पार कर गया है।रिजर्व बैंक ने भी माना है कि रूपए में गिरावट जारी रहेंगी।

रूस यूक्रेन युद्ध को आज 160 दिन से अधिक होने आ रहे हैं। यूक्रेन के कई शहरों पर अब रूस का कब्जा हो चुका हैं, कई शहर पूरी तरह बर्बाद हो गए है। अमेरिका ने यूक्रेन की मदद के लिए कई दावे ओर प्रयास शुरू किए थे। यूरोप के 30 से अधिक देशों ने यूक्रेन को मदद देने के लिए कई प्रयास किए। इस बीच अमेरिका ने रूस पर कई कड़े प्रतिबंध भी लगाकर उसे बर्बाद करने के सारे प्रयास शुरू कर दिए थे।

कुछ समय तक ऐसा लगा कि अब रूस खड़ा नहीं हो पाएगा, परन्तु रूस के राष्ट्रपति ओर वित्तमंत्री ने बड़ी रणनीति बनाकर जिन देशों को कच्चे तेल ओर कोयला की मांग ज्यादा थी उन्हें 30 प्रतिशत से भी अधिक छूट पर कच्चा माल देना प्रारंभ कर दिया, जिसके चलते भारत सहित चाईना ओर कई अफ्रीकी देश खरीददारी में जुट गए। अमेरिका ने रूबल पर कारोबार में प्रतिबंध लगाकर रूस का अरबों डॉलर जो अन्य देशों की बैंकों में जमा थे, जब्त कर लिए। परन्तु इसके बाद भी रूस ने भारत से रुपए में ओर चीन से युआन में लेन-देन शुरू किया, भारत की कई कंपनियों ने रूस से कोयला ओर कच्चा तेल आयात किया, जिससे उन्होंने बड़ी बचत भी कर ली। दूसरी ओर अन्य देशों ने भी कम कीमत के कारण जमकर खरीददारी की ओर डॉलर के मुकाबले 135 रूबल तक पहुंचा। रूबल वापस डॉलर के मुकाबले 55 रूबल तक आ गया, जो युद्ध के पहले से भी ज्यादा उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इधर भारत में तमाम कोशिश के बाद भी रूपया लगातार गिरता जा रहा हैं।

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