उर्दू में लिखी हनुमान चालीसा की मांग दो गुना

हिजाब, अजान तीन तलाक और नमाज विवाद के बाद...

इंदौर (धर्मेन्द्र सिंह चौहान)। देश मे हिजाब, अजान और नमाज के बीच शहर की प्रमुख बुक स्टॉलों पर उर्दू में लिखी हनुमान चालीसा ओर सुन्दरकाण्ड की मांग दो गुनी बढ़ गई है। इन दोनों ही धार्मिक ग्रंथों की मांग पिछले दिनों के मुकाबले दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। पूरे देश में लाउडस्पीकर, हिजाब, अजान और नमाज पर जैसे-जैसे विवाद बढ़ रहा है वैसे-वैसे उर्दू में लिखे हिन्दू साहित्य की मांग भी बढ़ती जा रही है।
पाकिस्तान, अफगानिस्तान के साथ ही अन्य मुस्लिम देशों से आए शरणार्थी जिन्होंने भारतीय नागरिकता ले कर इंदौर में ही अपना जीवन यापन करना शुरू कर दिया है। यह लोग उर्दू में लिखी हनुमान चालीसा ओर सुंदरकाण्ड के साथ ही अन्य साहित्य भी ज्यादा खरीद रहे है। ऐसे लोगो द्वारा प्रदेश के सबसे बड़े कॉपी किताब के खजूरी बाजार में मांग बढ़ती जा रही है। चूंकि ऐसे लोगो ने अपने जीवन का ज्यादातर समय मुस्लिम देशों में बिताया है, जिससे इन्हें हिंदी का अनुभव कम ही है।
ऐसे लोगो की शुरूआती शिक्षा-दीक्षा उर्दू में ही हुई है जिससे हिंदी का ज्ञान कम होने से हिंदी की किताबों को पढ़ने में होने वाली परेशानी से बचने के लिए उर्दू में लिखी हनुमान चालीसा ओर सुन्दरकाण्ड की किताबें खरीदना पढ़ रही है। जिसके चलते इंदौर में सुंदर कांड और हनुमान चालीसा जैसे धार्मिक ग्रंथों की मांग काफी बढ़ गई है। इन दोनों ही धार्मिक ग्रंथों की मांग आम दिनों के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई है। खास बात यह है कि इंदौर में हिंदी ही नहीं उर्दू की हनुमान चालीसा व सुन्दरकाण्ड के साथ ही अन्य हिन्दू धार्मिक ग्रंथों की भी खासी मांग हो रही है।
कुछ समय पहले मुश्किल से उर्दू भाषा की हनुमान चालीसा की बिक्री होती थी, लेकिन अब लोग उर्दू में लिखी हनुमान चालीसा खूब खरीद रहे हैं। खजूरी बाजार स्थित सरदार सोहन सिंह बुक सेलर पर इन दिनों उर्दू में लिखी हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और रामायण लेने ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं। दुकानदार की माने तो पहले जहां एक दिन में 200 के आसपास उर्दू की किताबे बिकती थी, मगर पिछले कुछ दिनों से इनकी मांग दुगनी से ज्यादा हो गई। सरदार सोहन सिंह बुक सेलर के संचालक का कहना है कि पंजाब के सिंध प्रदेश से विस्थापित लोग, जिन्होंने इंदौर में शरण ली है वो लोग वर्षों तक पाकिस्तान में रहे। इसलिए इन्हें उर्दू भाषा में बोलना और पढ़ना हिंदी की अपेक्षा ज्यादा सरल लगता है। इसलिए इस समुदाय के लोग उर्दू भाषा में हनुमान चालीसा रामायण और सुंदर कांड खरीदने बड़ी तादाद में आ रहे है।
वही पिछले दिनों से हिंदी भाषा मे लिखी किताब भी बढ़ी संख्या में खरीदी जा रही है। युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा हनुमान चालीसा खरीदने दुकान पर पहुंच रही है। संचालक का कहना है कि पिछले कई सालों की अपेक्षा पिछले कुछ महीनों में युवाओं ने सबसे ज्यादा हनुमान चालीसा खरीदी है। इंदौर में वैसे तो हनुमान चालीसा का पाठ अधिकतर हिंदू परिवारों में ही होता है, लेकिन अब अन्य भाषा के लोग भी इसका पाठ कर रहे हैं। जिससे इन धार्मिक ग्रंथों की मांग दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है।

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