सरकारी जमीनों की महासेल…

दिल्ली के आकार से नौगुना जमीनें बाजार में आएगी

नई दिल्ली (दोपहर आर्थिक डेस्क)। सरकार पांच राज्यों के चुनाव निपटते ही एक बार फिर विनिवेश कार्यक्रम के तहत इस बार सरकारी जमीनों की महासेल लगाने जा रही है। इस बार निजीकरण का तरीका बदल दिया गया है। चुनाव के समय ही कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया है। इसे ग्राउंड फिल्ड मॉनिटाइजेशन का नाम दिया गया है। इसमें 13,550 स्क्वेयर किलोमीटर जमीनें बाजार में उतारी जाएंगी। यह जमीनें इतनी हैं कि इसमें 9 दिल्ली बनाए जा सकते हैं। सबसे ज्यादा जमीनें रेल विभाग की बाजार में आएगी। कुछ स्टेशन भी बेचे जाने को लेकर सहमति बनाई जा रही है।
पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने ग्लोबल इनवेस्टर मीट के लिए हुए वेविनार में भी इस बात के संकेत दिए थे। इसके बाद इस प्रस्ताव को कैबिनेट मंत्रियों की बैठक में भी पिछले दिनों पास कर दिया गया। इसी के तुरंत बाद नीति आयोग और वित्त मंत्रालय ने पीएसयू की खाली जमीनों के अलावा रेलवे, कोयला, पॉवर, हेवी इलेक्ट्रिकल, स्टील और रक्षा विभाग की जमीनों को लैंड फार्मेशन सिस्टम बनाकर उसमें डाल दिया। इसे जीआईएलएस के नाम से पंजीकृत किया गया है। इसमें अभी 13,550 स्क्वेयर किलोमीटर जमीनें दिख रही है। अब इन जमीनों को सरकारी कंपनी खुले बाजार में बेचने की प्रक्रिया प्रारंभ करेगी। इसके लिए नीति आयोग और वित्त मंत्रालय ने नियम बनाना प्रारंभ कर दिया है। उल्लेखनीय है कि सरकार के विनिवेश कार्यक्रम में एक लाख करोड़ से ज्यादा पिछले वित्त वर्षों में आने थे, परंतु कंपनियों की खरीदी नहीं हो पाई। इस साल भी 38 हजार करोड़ का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के पास यह जमीनें खाली हैं और इन पर कोई योजना नहीं है। हालांकि सीएजी की रिपोर्ट बता रही है कि रेल विभाग की कई जमीनें न्यायालयों में उलझी हुई है। इसके बाद भी पीएसयू सहित कई मंत्रालयों की जमीन भी बेचने के लिए इस पुल में डाली जा रही है। जमीनें के 31 हजार 63 लैंड पार्सल बनाए गए हैं। छोटी-छोटी जमीनों के पैकेट में 2900 स्क्वेयर किलोमीटर के पार्सल बने हुए हैं। सबसे ज्यादा जमीन रेलवे विभाग की है। दूसरे नंबर पर कोयला मंत्रालय की और तीसरे नंबर पर पॉवर क्षेत्र के अलावा रक्षा मंत्रालय की बड़ी जमीन बाजार में आएगी। इस साल तमाम कोशिश के बाद भी एलआईसी का आईपीओ नहीं आ पाएगा, इससे भी सरकार एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा एकत्र करने का लक्ष्य बना रही है।

27 प्रतिशत रोड़ भी बेचे जाएंगे
सरकार पर जहां राजकोषिय घाटे का दबाव बढ़ रहा है वहीं देश के 27 प्रतिशत राष्ट्रीय राजमार्गों को भी बेचने की तैयारी की जा रही है।
राजस्व घाटा खुला छोड़ा
ताजा बजट में इस बार कच्चे तेल की कीमतों ने सरकार के पूरे बजट को ओंधा कर दिया है। सरकार के बजट में 75 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से आंकलन किया गया था, परंतु अभी 120 डॉलर के बाद अगले कुछ माह कच्चा तेल 100 डॉलर के आसपास ही रहेगा। इससे सरकार का वित्तिय संतुलन गड़बड़ा जाएगा।
बीएसएनएल की जमीनें नहीं बेच पाया
पिछले साल सरकार ने बीएसएनएल और एमटीएनएल की जमीनों को बाजार में उतारने के कई प्रयास किए थे। चाही गई बोलियां नहीं आने के बाद सरकार ने इसे रद्द कर दिया। इन जमीनों को भी इसमें जोड़ लिया गया है। देशभर में दोनों विभागों की 10 हजार करोड़ की जमीनें खाली पड़ी हुई है।

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