सुलेमानी चाय-बीजेपी में मुंगेरियों के हसीन सपने…उमेश बाबू की पोस्ट से वक्फ जिला इकाई में खलबली

बीजेपी में मुंगेरियों के हसीन सपने…
अल्पसंख्यक मोर्चे में ऐसे ऐसे लोग नगर अध्यक्ष बनना चाहते है, जिन्हें बूथ अध्यक्ष पन्ना प्रमुख के लायक भी नही समझते,
कुछ तो ऐसे भी है जिन्हें बूथ तक कि जानकारी नही, उन्हें भी नगर अध्यक्ष के सपने आ रहे है। इसमे मज़ेदार बात ये हैं कि मोर्चे में कई नेता ऐसे भी है जिनका नाम अल्पसंख्यक पैनल में अध्यक्ष के लिए चल रहा है, उनको उनका बूथ अध्यक्ष, अपने बूथ के सबसे छोटी भूमिका पन्ना प्रमुख के लायक़ भी नहीं समझता, उनका पूरी डायरी मैं कही नाम नही है, तो एक दूसरे दावेदार ऐसे है जो कि वार्ड के ज़िम्मेदार है। जिनके वार्ड में आधे बूथ अल्पसंख्यक है 14 दिन बाद भी ये डायरी नही जमा करा पाये थे। वार्ड में बहूसंख्यक बूथ का काम संघठन ने खुद पुरा कर लिया है, अल्पसंख्यक बूथ पे काम के लिए वार्ड अध्यक्ष ने हाथ ऊंचे कर लिए है, इन्हे पुरे शहर का अध्यक्ष बनना है।
अपनी नगर बीजेपी में ऐसे ओर भी कई मुंगेरी है।जिन्हें काम तो ढेले का नही आता पर नगर अध्यक्ष जरूर बनना है।
उमेश बाबू की पोस्ट से वक्फ जिला इकाई में खलबली
उमेश बाबू की पोस्ट से जहां बीजेपी की नगर इकाई में उथल पुथल मच गई है। वहीं जिला वक्फ इकाई में भी खलबली चल रही है। हुआ यूं कि कल बीजेपी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता उमेश बाबू ने एक तीर से दो निशाने साधे थे। जिसमें सीधे तौर पर तो नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे को कटघरे में खड़ा किया था कि आप कांग्रेस से आए हैं, और आपकी सरकार में हमने डंडे खाए हैं। इस तीर का दूसरा सिरे से उमेश बाबू ने बीजेपी के आला नेताओं पर तंज कसते हुए अपना दर्द जाहिर किया है। इस पूरे घटनाक्रम से बीजेपी के मुस्लिम नेता भी वक्फ बोर्ड के जिला अध्यक्ष की तरफ उंगलियां उठा रहे हैं, की बरसो से पार्टी के झंडे तो हम उठा रहे हैं, और कांग्रेस में रहकर बीजेपी और प्रदेश की भाजपा सरकार के पुतले जलाने वालो को संगठन ने जिला अध्यक्ष बना कर हमारे सर पर बैठा हैं राज साहब पूरे जिले में राजा साहब बने घूम रहे है। ऐसे में अगर मलाई कांग्रेसी खयगे तो हम झंडे उठाने वाले नेता कहां जाएंगे।


इस बार भी बिना कमेटी उर्स
खजराना नाहर शाह वली दरगाह में हो सकता है अबकी बार भी उर्स में सदर ओर कमेटी के घोटालों से बची रह जाय। फ़रवरी में उर्स होना है नासिर शाह, और बाबा की पटरी नही बेठ पा रही, बाबा को शाह के अलावा पटेल, पठान कोई भी चलेगा, लेकिन इनके भी शुभचिंतक गेती, फावड़ा ले कर तैयार बैठे है।
पिछली बार भी तहसीलदार सिराज खान की देख रेख में एक आइस्थाई कमेटी ने ही उर्स करवाए थे, इस बार भी यही होना है। नाहर शाह वली दरगाह पहली बार इतने वक्त के लिए बगैर कमेटी के रही है, अच्छा है उर्स ओर दरगाह में सफाई भी जरूरी है।

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