आने वाला साल लाने वाला है नया उपहार नागर शैली में हो रहा अद्भूत मंदिर तैयार

एक ही सभा मंडप में होंगे नवदुर्गा, दस महाविद्या और 64 योगिनियों के दर्शन

(आशीष साकल्ले ‘अटलÓ)
इंदौर। शायद आप यकीन नहीं करेंगे, आप हैरान भी होंगे। बावजूद इसके, यही शाश्वत सत्य है। आने वाला साल नया उपहार लाने वाला है और वह भी किसी एक शख्स के लिए नहीं, बल्कि हर इंदौरियंस के लिए। सवाल भी पूछ सकते है, क्या होगा उपहार, तो वह है नागर शैली में तैयार होने जा रहा माता का दरबार। यह मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा अद्भुत मंदिर होगा, जहां आप एक ही सभा मंडप में नवदुर्गा, दस महाविद्या, ६४ योगिनियों के साथ महाभारतकालीन कृष्ण लीलाओं के भी दर्शन कर सकेंगे।
जी हाँ….! यहां पर चर्चा चल रही है महानगर को गौरवान्वित करने वाले लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्रमां अन्नपूर्णा आश्रम की। आपने अभी तक यहां सिर्फ अन्नपूर्णा मंदिर ही देखा है, लेकिन आने वाले साल आप महामाया के दिव्य एवं अदभुत मंदिर के दर्शन कर सकेंगे। आश्रम परिसर में युद्धस्तर पर चल रहे पुर्न निर्माण कार्य में मध्यप्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा सहित तीन राज्यों के वास्तुविद एवं शिल्पकार जुटे हुए हैं। मंदिर में मां अन्नपूर्णा का दरबार १०८ फीट लंबा और ५४ फीट चौड़ा होगा।
ब्रह्म. स्वामी परमानंदजी गिरी के द्वारा की गई थी स्थापना….
देखा जाए तो अन्नपूर्णा आश्रम के अधिष्ठाता ब्रह्मलीन स्वामी प्रभानंद जी गिरि महाराज ने १९५९ में जब इसकी स्थापना की थी तब यहां सघन वनक्षेत्र एवं खेत हुआ करते थे। धीरे धीरे यह आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। मंदिर के दर्शन करने देश-विदेश के पर्यटक भी पहुंचने लगे और महानगर के गौरव के रुप में प्रतिष्ठित हो गया। यही पुननिर्माण का महायज्ञ चल रहा है, आस्थावान आहूतियां अर्पित कर रहे है।
२०२३ का उपहार होगा महानगरवासियों के लिए
मंदिर को नवदुर्गा, दसविद्या ६४ योगिनियों की मूर्तियां बनाने का काम तीव्र गति से चल रहा है। दरनार के चबूतरे शिल्पकार महाभारत काल के दौरान षोषड (१६) कलाओं से परिपूर्ण भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का शिल्पांकन किया जा रहा है। अगले वर्ष गुप्त या शारदीय नवरात्रि में भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खुल जाएंगे। निश्चित तौर पर नए साल २०२३ में महानगर के लिए इससे अच्छा उपहार क्या होगा? इससे महानगर में पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे और इंदौर की प्रतिष्ठा भी।
उड़ीसा और राजस्थान की वास्तुकला होगी दर्शनीय
१६ हजार वर्ग फीट में तैयार हो रहे नागर शैली के इस अदभुत मंदिर में उड़ीसा एवं राजस्थान की वास्तुकला भी दर्शनीय होगी। मार्बल के ५० स्तंभों पर निर्मित होने वाले मंदिर की ऊंचाई ८१ फीट होगी। राजस्थानी कारीगर पिलर्स फिट कर रहे हैं तो उड़ीसा के शिल्पकार दीवारों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां, शुभ चिन्ह एवं कलाकृतियां उकेर रहे हैं। सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मंदिर निर्माण में लोहगे का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

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