ठुमरी, खयाल और ध्रुपद के महारथी थे जगजीतसिंह

8 फरवरी को 'जगजीतसिंहÓ के जन्म दिवस के अवसर पर

इंदौर। अपनी अनोखी और सुरिली आवाज़ में गायी गजलों से पहचाने जाने वाले, गजलों के राजा कहलाने वाले ‘जगजीतसिंहÓ का दिनांक 8 – फरवरी को जन्म दिवस है, आपका जन्म इसी दिन सन् 1941 में राजस्थान के ‘श्री गंगा नगरÓ में हुआ था, पिताजी का नाम था ‘अमरसिंह धिमानÓ, जन्म के समय उनका नाम रखा गया था ‘जगमोहनÓ बाद में उनके पिताजी को किसी ज्योतिष ने नाम बदलकर ‘जगजीतÓ रखने की सलाह दी थी।
जगजीत सिंह की प्रारंभिक शिक्षा श्री गंगा नगर के खालसा हायस्कुल, उच्च शिक्षा श्री गंगा नगर के गवर्नमेंट कॉलेज और जालंधर के – डी ए वी कॉलेज से पुर्ण हुई, पिताजी चाहते थे पढ़ने के बाद इंजीनियर बनें, गीत – संगीत के शौकीन जगजीत सिंह एक बड़े गज़ल गायक बन गये, आपने संगीत की शिक्षा पं छगनलाल शर्मा और उस्ताद जमालखान से प्राप्त की और सन् 1961 में आल इंडिया रेडियो के जालंधर केन्द्र से गाना शुरू किया, सन् 1962 में उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद के सम्मान में स्वयं का लिखा गीत अपनी आवाज़ में प्रस्तुत किया था।
सन् 1965 में फिल्मों में भाग्य आजमाने मुंबई आ गये, यहाँ किसी से भी जान पहचान नहीं थी, संघर्ष शुरू हुआ, शुरुआत हुई विज्ञापन फिल्मों के जिंगल गाने से, धीरे धीरे पहचान मिली कुछ फिल्मी गीत गाने का अवसर मिला, वे स्वयं एक अच्छे म्यूजिक कम्पोजर थे सो उन्होंने अपनी कम्पोज की हुई धुनों पर गजलें गाने की शुरुआत की और शीघ्र इस विधा में लोकप्रिय हो गये। जगजीत सिंह- शास्त्रीय गायन में माहिर थे उन्हें ठुमरी, खयाल और ध्रुपद में विशेष रूचि थी, जब उन्होंने गज़ल गायकी में कदम रखा उस समय इस क्षेत्र में कई दिग्गज गज़ल गायक छाये हुए थे, लेकिन अपनी मेहनत- लगन और स्वयं की कम्पोज की हुई धुनों के सहारे वो गज़लों की दुनिया में एक उंचे पायदान पर जा पहुंचे थे।
आपको मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सन् 1998 में ‘लता मंगेशकरÓ पुरस्कार, सन् 1990 में दिल्ली सरकार द्वारा गालिब पुरस्कार, भारत सरकार द्वारा सन् 2003 में ‘पद्म भूषण अलंकारÓ से सम्मानित किया गया, राजस्थान सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ‘राजस्थान रत्नÓ से सम्मानित किया था।
सन् 2011 में उनका स्वर्गवास हो गया, उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
-सुरेश भिटे

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