चींटी की चाल से बनने वाले चार्जिंग स्टेशनों पर उठने लगे हैं सवाल…!

300 की है योजना, पहले चरण में बनाये जाएंगे 119 स्टेशन

इंदौर। स्थानीय प्रशासन एवं नगर निगम द्वारा महानगर की आबोहवा सुधारने के लिए नित नये प्रयास किए जा रहे हैं। वायु गुणवत्ता सुधारने की इसी पहल के चलते अब धुंआ छोड़ने वाले वाहनों व सवारी रिक्शाओं की जगह ई-रिक्शा चलाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन इस हेतु बनने वाले चार्जिंग स्टेशनों की चीटी जैसी चाल पर सवाल भी उठने लगे हैं। हाल फिलहाल तीन सौ स्टेशन बनाये जाने की योजना है और इसके पहले चरण में ११९ स्टेशन बनाने हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर अभी भी इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है।
उल्लेखनीय है कि स्वच्छता में पंच लगाने के बाद नगर पालिक निगम इंदौर और स्थानीय प्रशासन द्वारा अब वायु गुणवत्ता सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के चलते इलेक्ट्रानिक वाहनों को प्रोत्साहित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
इसके लिए चार्जिंग स्टेशन बनाने की कवायद शुरु हो चुकी है। वैसे तीन सौ चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना है और ११९ पहले चरण में बनाये जाएंगे। संभवत: अगले माह इनकी शुरुआत होगी, लेकिन जिस तरह से इनकी गति है उस पर अभी से सवाल उठने लगे हैं।
कुछ के लिए तय तो कुछ के लिए चुनना बाकी है एजेंसी
शहर में चार्जिंग स्टेशन बनाये जाने के लिए अभी तक ४६ स्टेशनों के लिए एजेंसी तय हो चुकी हैं। जबकि शेष ७६ चार्जिंग स्टेशनों के लिए टैंडर जारी किए गए हैं। अभी तक गुजराती कॉलेज के पास पटेल ब्रिज के नीचे प्रेमसुख टाकिज पार्किंग के पास स्थान चयनित किए गए हैं। यहां पर सिर्फ सर्वे का कार्य ही हुआ है और चार्जिंग स्टेशन निर्माण की प्रक्रिया अभी अधर में ही लटकी हुई है। बचे हुए ७६ चार्जिंग स्टेशनों के लिए एजेंसी तय होने के बाद ही इसके निर्माण की प्रक्रिया गति पकड़ सकेगी।
दो साल तक मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी सुविधा
सूत्रों के अनुसार निगम द्वारा चार्जिंग स्टेशन का निर्माण करने के साथ ही यहां से ई-रिक्शा चालकों को दो वर्ष तक मुफ्त चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद में इनसे चार्ज वसूला जाएगा। इससे ना केवल वायु गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि घासलेट व डीजल से चलने वाले वाहनों पर भी अंकूश लग सकेगा। गौरतलब है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा जहां सब्सिडी उपलब्ध करवाई जा रही है वहीं उन्हें फाइनेंस की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। इसके चलते शहर और राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ रही है।

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