400 में से 40 करोड़ ही वसूल सका नगर निगम

अब भुगतान नहीं करने वालों के काटे जाएंगे नल कनेक्शन

इंदौर।
नगर पालिक निगम को महानगर के बाशिंदों से जलकर के रुप में ४०० करोड़ रुपए की राशि वसूलनी है, लेकिन हर साल वह महज ४० करोड़ रुपए ही वसूल पा रहे हैं। इस कारण बकाया राशि हर साल बढ़ते ही जा रही है। इसके चलते अब जलकर का भुगतान नहीं करने वाले लोगों के नल कनेक्शन काटने की तैयारी शुरु कर दी है। इसके लिए राजस्व विभाग के साथ ही जल प्रदाय विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों को बकाया वसूली और नल कनेक्शन काटे जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उल्लेखनीय है कि नगर निगम द्वारा हर वर्ष संपत्तिकर के रुप में अच्छी खासी वसूली की जाती है और इसमे राजस्व अमला लगातार अव्वल रहा है, लेकिन जलकर की वसूली के मामले में नगर निगम लगातार फिसड्डी साबित हो रहा है। इसके चलते जलकर की बकाया राशि ४०० करोड़ से अधिक हो चुकी है। इसी के मद्देनजर निगमायुक्त प्रतिभा पाल द्वारा ३१ मार्च तक जलकर के रुप में सौ करोड़ रुपए की वसूली कर टारगेट दिया गया है और इस कार्य के लिए राजस्व विभाग के साथ ही जलप्रदाय विभाग के इंजीनियरों को समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिये गये हैं। इतना ही नहीं इनकी मानिटरिंग का दायित्व नर्मदा प्रोजेक्ट के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव को सौंपी गई है।
१५ करोड़ से अधिक होता है हर माह खर्च
देखा जाए तो महानगर के बाशिंदों की प्यास बुझाने के लिए जलूद से इंदौर तक नर्मदा का पानी लाया जाता है और लगभग ७० किलोमीटर दूरी से महानगर तक पानी लाने में निगम को हर माह पंद्रह करोड़ से अधिक की राशि खर्च करनी होती है और यह आंकड़ा सालाना १९० करोड़ से पार होता है। दूसरी ओर जलकर के रुप में निगम को सालाना महज चालीस करोड़ रुपए ही प्राप्त होते हैं। इसी के चलते निगमायुक्त ने जलकर वसूली सख्ती से करने और अवैध नल कनेक्शन काटने के निर्देश दिये हैं।
मुहिम भी नहीं हो सकी कारगर
महानगर में नगर निगम द्वारा अवैध नल कनेक्शन को वैध करने के लिए मुहिम भी चलाई गई थी और इसकी जिम्मेदारी निगम के १९ झोनों पर तैनात जल प्रदाय विभाग के सहायक यंत्रियों एवं उपयंत्रियों को सौंपी गई थी। बावजूद इसके, दृढ़इच्छाशक्ति के अभाव में यह मुहिम कारगर नहीं हो सकी। और तो और यह मुहिम अब ठप्प हो चुकी है। देखा जाए तो मलीन बस्तियों के लोगों से २२५० रुपए और अन्य लोगों से ३७५० रुपए लेकर अवैध नल कनेक्शन को वैध किया जा सकता है और यदि यह मुहिम दम पकड़ती है तो निगम को इससे अच्छे खासे राजस्व की प्राप्ती हो सकेगी।

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