पुरातत्व विभाग की जमीन पर नगर निगम ने किया अवैध कब्जा

बिना परमिशन बना लिया कचरा स्टेशन, अब हटाने के मामले में कर रहा लेटलाली

इंदौर। वर्षों पहले पुरातत्व विभाग ने जमीन खरीदी थी। इस जमीन पर
कतिपय अतिक्रामकों द्वारा अतिक्रमण भी कर लिया गया। हद तो यह हो गई कि नगर निगम भी पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा करने से बाज नहीं आया और उसने वहां कचरा स्टेशन बना लिया। अब जब हटाने की बारी आई तो वह इस मामले में लेतलाली कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि बरसो पहले पुरातत्व विभाग ने लालबाग के पीछे राजमहल कॉलोनी से केसरबाग की ओर जाने वाले रास्ते के समीप स्थित वन विभाग की जमीन लाखों रुपए में खरीदी थी। इस जमीन में से चार एकड़ जमीन अर्बन हाट के लिए आवंटित कर दी गई। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से उक्त जमीन को नजूल की बताते हुए इसे नगर निगम को दे दिया गया। नगर निगम ने भी यहां बिना कोई सोच विचार के कचरा स्टेशन बना दिया और अब तो कचरा स्टेशन के पास ही शराब दुकान भी खुल गई है। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की जब तक नींद खुलती तब तक यहां और भी कई अतिक्रमण हो गये। अब पुरातत्व विभाग अपनी जमीन को मुक्त कराने के लिए कशमकश कर रहा है।
६५ लाख में खरीदी थी १८ एकड़ जमीन
सूत्रों के मुताबिक पुरातत्व विभाग द्वारा १९८७ में उषाराजे ट्रस्ट से ६५ लाख रुपये में १८ एकड़ जमीन खरीदी गई थी। पुरातत्व विभाग की लापरवाही एवं उदासीनता के चलते इसी जमीन में से जिला प्रशासन द्वारा चार एकड़ जमीन मध्यप्रदेश हथकरघा उद्योग के तहत अर्बन हाट के लिए आवंटित कर दी गई। जब यह जमीन अर्बन हाट के लिए आवंटित की गई थी। तब यह कहा गया था कि पुरातत्व विभाग को इसकी कीमत अदा कर दी जाएगी। बावजूद इसके, इस पर अमल नहीं किया गया। इधर नगर निगम द्वारा भी बिना कोई कीमत चुकाए पुरातत्व विभाग की जमीन पर कचरा स्टेशन बना दिया गया है और अब इसे हटाने में भी वह लेतलाली कर रहा है।
रामपुर कोठी का मामला भी अधर में लटका
यहां यह प्रासंगिक है कि सन् १८८६ में केसरबाग रोड़ पर ही महाराजा तुकोजीराव द्वितीय के राजतिलक के दौरान हरिराव होल्कर एवं यशवंत राव ने रामपुर के नवाब की स्मृति में रामपुर कोठी का निर्माण करवाया था। जहां होल्कर स्टेट की सेना की रसद रखी जाती थी। बाद में यहां आरटीओ दफ्तर लगना शुरु हुआ जिसे हटाकर नायता मुंडला ले जाया गया है। हाल फिलहाल यह कोठी खंडहर हो चुकी है। यहां पर भी कब्जे होना शुरु हो गये हैं और यह मामला भी अधर में लटक गया है।
भोपाल से चल रहा पत्र व्यवहार
पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा, नगर निगम द्वारा बनाये गये कचरा स्टेशन एवं अर्बन हाट के लिए आवंटित की गई जमीन के एवज में भुगतान में किए जाने के मामले को लेकर अब पुरातत्व विभाग द्वारा भोपाल से पत्र व्यवहार किया जा रहा है। पुरातत्व विभाग की जमीन पर कब्जा होने की वजह से वह अन्य कई योजनाओं को भी क्रियान्वित नहीं कर पा रहा है। अब देखना यह है कि आगे आगे होता है क्या?

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