अब हल्दी भी जीएसटी के दायरे में

पहले से ही पराठे पर जीएसटी विवाद, आईसक्रीम पर भी, भारी विरोध

मुंबई (ब्यूरो)। आपकी हल्दी महंगी होने वाली है। पहले इस पर कोई टैक्स नहीं लगता था। महाराष्ट्र की जीएसटी अथरिटी ने पांच फीसदी टैक्स लगाने का आदेश दे दिया है। जीएसटी एएम में इसे कृषि उत्पाद मानने से इनकार कर दिया है। क्योंकि पहले कच्ची हल्दी को उबालते हैं फिर पालिस करते हैं। यह कृषि उत्पाद की श्रेणी में आता है। उधर पहले ही पराठे और आइस्क्रीम पर जीएसटी का विवाद अभी सुलझा नहीं है जिसका भारी विरोध हो रहा है।
गुणकारी हल्दी अब टैक्स के दायरे में आ गई है। महाराष्ट्र जीएसटी आर ने इसे कृषि उत्पाद मानकर टैक्स के दायरे में नहीं लिया था। अब यह जीएसटी के दायरे में आ गई है। वहीं पहले से ही पराठे पर जीएसटी लगाने का विवाद हल नहीं हो पाया है और अब तक 300 से ज्यादा संशोधन जीएसटी में हो चुके हैं फिर भी व्यापारी इसे समझ नहीं पा रहे हैं।
उधर हाल ही में जीएसटी काउंसिल की बैठक में फैसला होने के बाद ताजा विसंगति में होटल में बैठकर आइस्क्रीम खाने पर पांच प्रतिशत जीएसटी देना होगा तो पार्लर से आइस्क्रीम लेने पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। वहीं रोटी को टैक्स फ्री किए जाने के बाद पराठे पर 18 प्रतिशत टैक्स गुजरात में प्रोसेस फूड मानते हुए लगा दिया गया है। इधर कर्नाटक में इडली डोसा भी टैक्स के दायरे में उलझ गए हैं। गुलाब जामुन पर पांच प्रतिशत टैक्स है तो गुलाब जामुन मिक्स के पैकिंग पर 18 प्रतिशत टैक्स और यही टैक्स इडली डोसा के मिक्स पर भी लगाया गया है। दुकानदारों को यह टैक्स लेकर सरकार को जमा करना है। दूसरी ओर सरकार रेस्टोरेंट में खरीदे जाने वाले कच्चे माल पर टैक्स में इनपुट देने को तैयार नहीं है। भारी विसंगतियों के बीच ई-वे बिल को लेकर भी खींचतान शुरू हो गई है।
जीएसटी लागू हुए इस देश में चार साल से ज्यादा हो चुके हैं। 340 से ज्यादा संसोशन के बाद भी कई विसंगतियां अभी जीएसटी में कारोबारियों को उलझाए हुए है। दूसरी ओर अब खाने-पीने के आयटम में भी नई विसंगतियां सामने आ गई हैं। अब रेस्टोरेंट में बैठकर आइस्क्रीम खाने पर मात्र 5 प्रतिशत टैक्स है तो पार्लर पर खाने पर 18 प्रतिशत। पार्लर कारोबारी कह रहे हैं हम चार कुर्सी लगाकर रेस्टोरेंट बना देते हैं। वैसे भी सब सामने ही खड़े होकर खाते हैं। सरकार ले रही टैक्स का इनपुट भी देने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर गुजरात में रोटी और पराठे को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है। यहां रोटी टैक्स फ्री है और पराठे पर प्रोसेस फूड मानते हुए इस पर 18 प्रतिशत टैक्स लगा दिया गया है। कई रेस्टोरेंट को नोटिस भी मिल चुके हैं। वहीं कर्नाटक के टैक्स डिपार्टमेंट ने इडली डोसा के मिक्स के पैकिंग पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया है, जबकि इसमें लगने वाले सामान पर कोई टैक्स नहीं था। सरकार लिए गए टैक्स पर कच्चा माल खरीदने पर रेस्टोरेंट संचालकों को इनपुट भी नहीं दे रही है। इधर महाराष्ट्र में गोल पापड़ टैक्स फ्री होने के साथ चौकोर पापड़ पर टैक्स बता दिया गया है। कुल मिलाकर 50 से अधिक ऐसे मामलों को लेकर अब एक बार फिर जीएसटी काउंसिल की बैठक इसी माह रखी गई है। जब से जीएसटी देश में लागू किया गया है, 300 से ज्यादा संशोधनों के बाद भी कई पैंच अभी भी कारोबारियों को उलझाए हुए हैं। इससे पहले जीएसटी काउंसिल की बैठक में पराठे और आईस्क्रीम पर जीएसटी टैक्स लगाने का जो फैसला किया गया था उसका विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।

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