6 माह बाद भी नहीं मिली देवी अहिल्या के लिए जमीन

अफसरों की उदासीनता के चलते मुख्यमंत्री की घोषणा भी हुई हवा-हवाई

इंदौर।
महानगर इंदौर की ख्याति को देश-दुनिया में पहुंचाने और उसमें चार चांद लगाने की वजह से लोकमाता के रुप में पूज्यनीय होलकर साम्राज्य की महारानी देवी अहिल्या का स्मारक बनाने के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा जोर-शोर के साथ घोषणा की गई थी। बावजूद इसके, अफसरों की उदासीनता के चलते ६ माह बाद भी देवी अहिल्या स्मारक के लिए जमीन नहीं मिली। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री की घोषणा भी हवा-हवाई हो गई।
देखा जाए तो महारानी अहिल्याबाई किसी परिचय की मोहताज नहीं है। उनके द्वारा जनहित में किए गए कार्यों ने ही उन्हें लोकमाता के रुप में प्रतिष्ठित किया और उनके प्रति जनआस्था एवं श्रद्धा के कारण ही वे देवी कहलाई। होल्कर रियासत की राजधानी किसी समय इंदौर ही थी, लेकिन यहां देवी अहिल्या का स्मारक तक नहीं है और लंबे समय से महानगर की पूर्व सांसद श्रीमती सुमित्रा महाजन इसके लिए प्रयास कर रही थी। श्रीमती महाजन के इन्हीं प्रयासों एवं महानगर इंदौर के नागरिकों की जनभावना का सम्मान करते हुए लगभग ६ माह पहले मुख्यमंत्री चौहान ने देवी अहिल्या का स्मारक बनाए जाने की घोषणा की थी।
धन्यवाद इंदौर कार्यक्रम में की थी मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक घोषणा
स्वच्छता में चौथी बार देश में नंबर वन आने के उपलक्ष में ३ जुलाई को महानगर में धन्यवाद इंदौर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस समारोह में भाग लेने के लिए मुख्यमंत्री इंदौर आए थे। इसी समारोह में सीएम ने देवी अहिल्या का स्मारक बनाए जाने की सार्वजनिक घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद अहिल्या स्मारक बनाए जाने के लिए जमीन की तलाश शुरु हुई। इसके बाद, केसरबाग रोड़ स्थित रामपुर कोठी का नाम स्मारक के निर्माण हेतु सुझाया गया, जिस पर सहमति बनने के बाद यह उम्मीद थी कि जल्द ही स्मारक निर्माण कार्य शुरु होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
कछुआ चाल चल रही है फाइल, ६ माह में भी नहीं हो पाया आवंटन
रामपुर कोठी में देवी अहिल्या स्मारक निर्माण के प्रस्ताव को पारित हुए ६ माह गुजर चुके है, लेकिन इसकी फाइल कछुए की चाल से चल रही है। इस वजह से अभी तक स्मारक निर्माण हेतु जमीन का आवंटन नहीं हो पाया है और कहीं न कहीं यह मामला उलझते जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अपनी खासगी संपत्ति से देश दुनिया मेें मंदिरों व घाटों का निर्माण तथा जीर्णोद्दार कर इंदौर का परचम फहराने वाली प्रात: स्मरणीय लोकमाता देवी अहिल्या का स्मारक कब मूर्त रुप लेता है? हर हर महादेव…
ऐतिहासिक महत्व वाली रामपुर कोठी की इमारत हो चुकी है जर्जर
जिस रामपुर कोठी की जमीन पर देवी अहिल्या का स्मारक बनाया जाना है, उसका अपना ऐतिहासिक महत्व है। पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार, सन १८१३ में महाराजा तुकोजीराव होलकर (द्वितीय) ने इसका निर्माण कराया था। उस समय यह कोठी होल्कर फौज की रसद रखने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। कालांतर में यह कोठी परिवहन विभाग को सौंपी गई, जहां वर्षों तक आरटीओ संचालित हुआ। इस दौरान उचित देखरेख एवं मरम्मत नहीं होने की वजह से यह बिल्डिंग अत्यंत ही जर्जर हो गई। बाद में आरटीओ नायतामुंडला में स्थानांतरित हो गया और यह कोठी अब वीरान पड़ी है।

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