बीआरटीएस कारिडोर पर अब मल्टीलेवल फ्लायओवर

फिजिबिलिटी सर्वे करवाकर डीपीआर बनायेगा मेट्रो ट्रेन कार्पोरेशन

इंदौर।
महानगर में बीआरटीएस कारिडोर की बॉटल नेक के ट्रेफिक मेनेंजमेंट के लिए मल्टीलेवल फ्लायओवर बनाया जाएगा। मेट्रो ट्रेन कार्पोरेशन इसका फिजिबिलिटी सर्वे करवाकर जल्द ही डीपीआर बनायेगा। मेट्रो ट्रेन कार्पोरेशन का यह प्रयास सार्थक सिद्ध हुआ तो मेट्रो प्लस एलिवेटेड कारिडोर की लागत चालीस फीसद कम हो सकती है।
देखा जाए तो महानगर इंदौर का जिस तरह से विस्तार हो रहा है, मेट्रो ट्रेन का यह रुट सर्वाधिक राइडरशिप वाला हो सकता है। हाल फिलहाल बीआरटीएस की राइडरशिप प्रतिदिन एक लाख यात्री से अधिक है और भविष्य में इसमे वृद्धि होना भी तय है। ऐसी स्थिति में यदि इस रुट को मल्टीलेवल पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह तैयार किया जाता है तो यह बहुउपयोगी साबित होगा क्योंकि भविष्य में वैसे भी आगरा-मुंबई रोड़ ही शहर को दो भागों में विभाजित करेगा।
लाइफलाइन कारिडोर होगा यह
इंदौर मेट्रो ट्रेन कार्पोरेशन के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर गौतम सिंह के मुताबिक बीआरटीएस कॉरिडोर पर बाटल नेक के ट्रेफिक मेनेजमेंट के लिए शहर में अब मल्टीलेवल फ्लायओवर बनाया जाना समय की मांग है। इसके लिए जल्द ही फिजिबिलिटी सर्वे शुरु करवाया जाएगा। पश्चात इसकी डीपीआर बनाई जाएगी। इसमे सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यदि मेट्रो एवं एलिवेटेड कारिडोर एक ही मीडियन पर बनता है तो एलिवेटेड का बजट भी इसमे शामिल किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त लागत में भी चालीस प्रतिशत की कमी आ सकती है। इसके माध्यम से निरंजनपुर से राऊ सर्कल तक इसे बनाकर पूरे शहर को एक सिरे से दूसरे सिरे तक जोड़ा जा सकेगा एवं ट्रेफिक प्रबंधन की दृष्टि से यह महानगर का लाइफलाइन कारिडोर होगा।
क्या होगी फ्लायओवर की निर्माण प्रक्रिया
सस्ते एवं सुगम लोकपरिवहन के लिए तैयार बीआरटीएस कारिडोर पर मल्टीलेवल फ्लायओवर निर्माण के लिए सबसे पहले फिजिबिलिटी सर्वे होगा। इस दौरान फ्लायओवर की उपयोगिता भी देखी जाएगी। साथ ही कनेक्टिव रूट्स एवं सघनता का अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा प्रचलित लोक परिवहन वाहन के साथ इंटीग्रेट कर उपयोगिता जांची जाएगी। मेट्रो के अन्य प्रस्तावित रुट के साथ समन्वय करना होगा। साथ ही निर्माण के लिए साइट की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए तब तक डीपीआर बनेगी और फ्लायओवर का निर्माण हो सकेगा।
नहीं मिली एलिवेटेड कारिडोर के लिए साइट चुकाना होंगे ३२ करोड़
बीआरटीएस के बाटल नेक के लिए प्रस्तावित एलिवेटेड कारिडोर को लेकर इन दिनों लोकनिर्माण विभाग असमंजस की स्थिति में फंसा हुआ है। इसकी मुख्य वजह यह है कि प्रोजेक्ट के लिए तय कान्ट्रेक्टर अहमदाबाद की राजकमल इन्फ्रा स्ट्रक्चर कंपनी तो काम करने के लिए तैयार है जबकि विभाग को साइट ही नहीं मिल रही है। साइट नहीं मिलने की स्थिति में विभाग को यह कान्ट्रेक्ट निरस्त करना पड़ेगा। यदि ऐसा होता है तो नियमों के मुताबिक, दस प्रतिशत याने तकरीबन ३२ करोड़ रुपए की राशि कान्ट्रेक्टर कंपनी को चुकाना होगी। इसी के चलते लोकनिर्माण विभाग ने इस संबंध में पत्र लिखकर शासन से मार्गदर्शन मांगा है। गौरतलब है पहले निर्माण लागत अधिक होने पर केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी ने एलिवेटेड कारिडोर की डीपीआर वापस कर दी थी। इसके बाद सरकार बदलने पर यह कार्य लोकनिर्माण विभाग को सौंपा गया है और इस प्रोजेक्ट की लागत ३२६ करोड़ रुपए बताई जा रही है। विडंबना यह है कि कान्ट्रेक्ट तो दे दिया गया किंतु लोकनिर्माण विभाग के पास साइट ही नहीं है। ऐसे में कान्ट्रेक्ट निरस्त करने के अलावा कोई चारा नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो विभाग को करोड़ों की चपत लगेगी।

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