फुटपाथ पर कब्जा कर बेची जा रही बीमारियां

घरेलू गैस सिलेंडर का बड़े स्तर पर होता हैं उपयोग

इंदौर। शहर में फुटपाथों पर कब्जा कर संचालित होने वाली कचोरी-समोसे की दुकानों में नियमों की धज्जियां उड़ाने के साथ लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। इन पर अंकुश लगाने वाले दोनों विभाग गहरी नींद में सो रहे हैं। शहर में एक लाख से ज्यादा ऐसी दुकानें हैं जो फुटपाथ पर कब्जा कर संचालित होती है। इन दुकानों की कढ़ाई में इस्तेमाल होने वाला तेल कभी बदला ही नहीं जाता हैं। ऐसे तेल में बनाए जाने वाले कचोरी-समोसे सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फूड विभाग ने कई वर्षों से ऐसी दुकानों से सेम्पलिंग तक नहीं ली। इतना ही नहीं यह दुकानदार अपनी दुकानों पर घरेलू गैस की टंकी का ही इस्तेमाल करते हैं। नगर निगम द्वारा भी इन पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती। यही कारण है कि शहर में ऐसी दुकानें बखौफ संचालित हो रही है।
एक ही तेल को कई बार गर्म करने से उसमें विषैले पदार्थ निकलने लगते हैं, जिससे मानव शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ जाते हैं, जिससे शरीर में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन दुकानदारों पर नजर रखने ओर कार्रवाई करने के स्थापित किए गए खाद्य विभाग के अधिकारी कई वर्षों से इन पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। 50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले शहर में ऐसी एक लाख से ज्यादा दुकानें हैं, जहां से रोजाना लाखों लोग कचोरी-समोसा खाते हैं। इन दुकानों की कढ़ाई में तेल कभी नहीं बदला जाता है। बार-बार रियूज तेल का उपयोग ही किया जाता है। इन दुकानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का बड़ी तादाद में इस्तेमाल किया जाता है। इन पर भी रोक नही लगाई जा रही है, जिससे गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी भी बहुत हो रही है।
बार-बार गरम करने से नुकसान
जानकारों का कहना है कि एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से उसके फैट पार्टिकल्स टूट जाते हैं। कुछ फेट ट्रांसफैट में बदल जाते हैं। यही ट्रांसफैट हानिकारक साबित होते हैं। जिससे दिल की बीमारियां बढ़ जाती है। कचोरी-समोसा और आलूबड़ा बनाने वाले यह फुटकर दुकानदार कभी-कभार ही कढ़ाई को साफ करते हैं। कढ़ाई में तेल खत्म होने पर उसमें ही दोबारा दूसरा तेल डाल देते हैं। एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से उसका फेट इतना बढ़ जाता है कि इसमें पके कचोरी-समोसे-आलूबड़े को खाने से धमनियों में रूकावट पैदा होने लगती है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के साथ ही एसिडिटी, दिल की बीमारियों के साथ ही कैंसर जैसी जान लेवा बीमारियां जन्म ले लेती है। क्योंकि ऐसे तेल में एंटी ऑक्सीडेंट्स भी नहीं बचता है।

होना यह चाहिए…
कढ़ाई में तेल डालने से पहले यह तय कर लेना चाहिए की एक बार में एक ही कंपनी का तेल डालें। अलग-अलग कंपनी के तेल का उपयोग करना भी हानिकारक होता है। इसके साथ ही एक ही तेल को बार-बार गर्म नहीं करना चाहिए। जब तेल का वास्तविक रंग बदल जाए तो उसे फेंक देना ही उचित होता है। ऐसे तेल का उपयोग बिल्ककुल भी नहीं करना चाहिए जो गर्म होने पर झाग बनाने लगते हैं। ऐसा तेल एडल्ट्रेटेड तेल होता है, जो शरीर को काफी नुकसान पहुंचाता है। सोयाबीन, राइस ब्रैन, सरसों, मूंगफली और तिल का तेल हमेशा ज्यादा तापमान पर गर्म होता है। इन तेलों का इस्तेमाल उतना ही करना चाहिए जितनी आपको जरूरत हो, इन्हें बार-बार गर्म करने से यह विषैले हो जाते हैं।

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