समस्या सड़क की नहीं शहर में पार्किंग की….

मालवामिल जेलरोड़, टोरीकार्नर पर सड़कों पर ही सज रही है दुकानें

इंदौर। एक बार फिर सुभाष मार्ग को सौ फीट चौड़ा करने को लेकर नये सिरे से कवायद शुरु हो गई है। तीस फीट चौड़े रोड़ को वर्ष १९७५ के दशक में जब सुभाष मार्ग के रुप में विकसित किया गया था। उस वक्त भी सभी रहवासियों से सड़क और फुटपाथ के लिए एक बार जमीन ली गई थी। एक बार फिर अब सौ फीट रोड़ के लिए यहां पर बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ होगी। सबसे ज्यादा असर जिंसी चौराहे से रामबाग तक दिखाई देगा। लगभग हर मकान आठ से दस फीट तक पीछे खसकाना होगा। आश्चर्य की बात यह है कि जिस जवाहर मार्ग पर सबसे ज्यादा दबाव यातायात का दिनभर रहता है वह अभी भी ६० फीट चौड़ा ही है। सड़कों के चौड़ीकरण से कहीं पर भी यातायात सामान्य होने का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका उदाहरण है मालवामिल से पाटनीपुरा और महूनाका से टोरीकार्नर तक सड़कों पर अभी भी दुकानें सजी हुई हैं। पहले जितनी जगह यातायात के लिए उपलब्ध थी उतनी ही जगह अभी भी उपलब्ध है।
शहर के चौड़ीकरण को लेकर इस समय ऐसी हवा चल रही है कि जहां सौ साल पुराने निर्माणों को बचाने के लिए देशभर में अभियान चल रहा है। पिछले दिनों दिल्ली के चांदनी चौक पर प्रारंभ किए गए विकास कार्यों के पुराने भवनों में किसी भी प्रकार की तब्दीली नहीं की गई। यहां मुगल शासन की छाप देखने को मिलती है। राजवाड़ा के आसपास पंद्रह साल पहले तक होल्कर रियासत की छाप देखने को मिल रही थी। व्यवसायिक स्पर्धा के चलते लगभग सभी मकानों ने अपने घरों को हटाकर व्यवसायिक भवन इस प्रकार निर्मित किये कि वे पार्किंग की जगह तो खा ही गये साथ में सरकारी भूमि पर भी उनका कारोबार आ गया। परिणाम यह हो रहा है कि राजवाड़ा पर ही पूरा कारोबार सड़कों पर ही हो रहा हैं। नई सड़क के लिए तोड़फोड़ करने के बजाए यदि शहर के पार्किंग स्थल ही खाली करवा लिए जाए तो दो लाख से अधिक वाहन सड़कों से हट जाएंगे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जेल रोड़ है। जहां इलेक्ट्रानिक बाजार के निर्माण के चलते हर बिल्डिंग का पार्किंग लाखों रुपए में बिक गया है। यहां पर अभी निर्मित हो रही तीन बिल्डिंगों में पीछे की ओर से सरकारी जमीन पर भी निर्माण चल रहा है। हर गली में वाहनों की लंबी लाईनें देखी जा सकती है। दिन में एक बजे से लेकर रात नौ बजे तक जेलरोड़ पर वाहनों को लाना और निकालना सबसे बड़ी समस्या है। यही स्थिति मालवामिल, पाटनीपुरा, टोरीकार्नर, गंगवाल से बड़ा गणपति तक देखी जा सकती है। जहां जहां भी निर्माणों को तोड़ा गया है उन सभी मार्गों पर आज भी धार्मिक स्थल बीच सड़क पर खड़े हुए हैं। इसके दो उदाहरण पलासिया चौराहे और जवाहर मार्ग पर देखे जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि १९७५ में जब सुभाष मार्ग के निर्माण की प्रक्रिया पुन: शुरु की गई थी उस वक्त भी सड़कों के किनारे जगह लेने के लिए कई मकानों को तोड़ा गया था। आने वाले दिनों में यदि मेट्रो के लिए भी जरुरत हुई तो क्या एक बार फिर जगह नहीं ली जाएगी। शहर के विकास को लेकर एक भी योजना जमीन आधारित नहीं हो पा रही है। आने वाले पांच साल बाद रीगल तिराहे पर हर मिनट छोटे बड़े पांच सौ वाहन तीनों ओर से निकलेंगे। अभी इस मार्ग पर एक वाहन भी खराब हो जाए तो दो किमी लंबा जाम लग जाता है। नगर निगम के पास इसे लेकर अभी भी कोई योजना नहीं है।

सड़कों पर लगे हुए हैं ७५ हजार ठेले…
इंदौर में सड़कें चौड़ी होने के साथ ही सभी सड़कों पर ठेलों की संख्या में भारी इजाफा हो गया है। एक ठेला निर्माण करने वाले दुकानदार ने दावा किया कि इंदौर में अब लगभग ७५ हजार ठेले हो चुके हैं। पहले स्वच्छता अभियान के चलते निगमायुक्त मनीष सिंह के भय से सड़कों पर ठेले लगना बंद हो गये थे और ठेलों का निर्माण भी नहीं के बराबर रह गया था। अब कोरोना महामारी के बाद बाजार खुलते ही चार महीनों में ही दस हजार से अधिक ठेले बने हैं। और अभी भी हर दिन सौ से अधिक ठेलों का निर्माण हो रहा है।

अगले वर्ष तक सड़कों पर २३ लाख वाहन होंगे
जहां सड़कों के चौड़ीकरण का लाभ इस शहर में सड़कों पर दुकान लगाने वालों को हो रहा है वहीं व्यापारियों ने भी अपना माल फुटपाथ पर रखकर कारोबार करने की आदत बना ली है। परिवहन विभाग का कहना है कि वर्ष २०१९ में जहां वाहनों की संख्या १९ लाख थी जो अब बढ़कर अगले वर्ष २३ लाख से ऊपर पहुंच जाएगी। इंदौर में एक हजार लोगों पर ४२९ वाहन सड़कों पर चल रहे हैं। आने वाले समय में सड़कों से ज्यादा जरुरत शहर को पार्किंग की ही होगी। हर व्यवसायिक भवन का पार्किंग ही शहर की सड़कों को बचा पाएगा।

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