20 कंपनियों में 2 लाख करोड़ रुपए स्वाह होंगे

दिवालिया हो रही कंपनियों ने बैंकों को हिलाया

नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारत सरकार द्वारा घाटे में चल रही कंपनियों के ऋण प्रकरणों के निराकरण हेतु बनाए गए ट्रिब्यूनल एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल) में 20 से अधिक कंपनियों ने दिवालिया होने के लिए अपने आवेदन लगाए है। जबकि कुछ और कंपनियों के मालिक रहीशी पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद अब इन कंपनियों को चलाने में इच्छुक नहीं है। इन कंपनियों में अलग-अलग दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज बैंकों से उठे हुए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 100 साल पुरानी बैंक स्टेट बैंक आफ इंडिया से लिए गए हैं। ट्रिब्युनल में जा रहे ऋण प्रकरणों में समझौता 25 से 30 पैसे के बीच ही हो पा रहा है। ऐसे में बैंकों में अब भारी घबराहट फैल गई है।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल बनाकर सरकार ने ऐसी कंपनियों के ऋण प्रकरणों का निराकरण करने के लिए प्रयास शुरू किया था, जिसमें बैंकों के डुबत या दिवालिया हो रही कंपनियों के साथ समझौता हो सके और बैंक इस प्रकार के कर्ज को अपनी बैलेंस शीट से हटा दे। इसमें अरबों रुपए ले चुकी कई कंपनियां अब एनसीएलटी के द्वार पर दिवालिया होने के लिए आवेदन दे चुकी है। इन कंपनियों ने सरकार के हर सुविधा के लाभ को उठाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। 2 साल पहले तक इनमें से कुछ कंपनियां कम ब्याज के कर्ज को भी उठा चुकी थी। अब यह कंपनियां दिवालिया होने के आवेदन लगाने के बाद बैंकों के 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा स्वाह करने जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से वीडियो कॉन कंपनी 29,000 करोड़ रुपए, जेपी इंफ्रा 22,000 करोड़ रुपए, आईबीआईसीएल 10,107 करोड़ रुपए, इंदौर की रूची सोया 4,513 करोड़ रुपए, एशिया कलर 3,019 करोड़ रुपए, बल्लार स्टील 6,000 करोड़ रुपए, भूषण पावर स्टील 37,248 करोड़, एमटेक ऑटो 14,000 करोड़ रुपए, इलेक्ट्रो स्टील 10,273 करोड़ रुपए, एयरा इंफ्रा इंजीनियर 12,000 करोड़ रुपए, ज्योति पावर 5,165 करोड़ रुपए, उत्तम गलवा स्टील 4,150 करोड़ रुपए, एस्सार स्टील 37,252 करोड़ रुपए, मोनेटिक स्पात लिमिटेड 12,115 करोड़ रुपए, एबीसी सीपीयाड 6,953 करोड़ रुपए, आलोक इंडस्ट्रीज 22,000 करोड़ रुपए है। इसमें आलोक इंडस्ट्रीज, रिलायंस ने संपत्ति के साथ 13,000 करोड़ रुपए में ले ली। इस दौरान इस बैंक के महाप्रबंधक जो थे, वे इन दिनों रिलायंस में स्पेशल डायरेक्टर बना दिए गए हैं। इसके अलावा 10 और ऐसी कंपनियां है जो बड़ी राशि लेकर दिवालिया होने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर इन उद्योगपतियों पर अरबों रुपए लुटा देने वाली बैंकें अपनी लाज बचाने के लिए छोटे खातों पर दी जा रही ब्याज की राशि का गला लगातार दबा रही है।

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