18 लाख करोड़ के बदले 28 लाख करोड़ रुपए चलन में आ गए

नई दिल्ली (ब्यूरो)। आज के ही दिन वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री ने एक हजार और 500 के नोट को चलन से बाहर कर दिया था। दावा था इससे कालाधन तो बाहर आएगा ही, साथ ही आतंकवाद की कमर भी टूट चुकी होगी। वहीं टैक्स चोरों पर भी लगाम कसा जाएगी, परन्तु आरबीआई की जारी की गई ताजा रिपोर्ट बता रही है कि न काला धन बाहर आया और पहले से दुगुने नोट बाजार के चलन में आ गए। यानी 4 नवंबर 2016 को देश में 17 लाख 74 हजार करोड़ रुपए चलन में थे, जो 8 अक्टूबर 2021 को अब बढ़कर 28 लाख 30 हजार करोड़ रुपए पर पहुंच गए हैं। यानी केसलेस इंडिया का नारा भी फ्लाप हो गया। इधर 2000 के नोट भी अब जहां छपना बंद हो गए हैं, 20 प्रतिशत नोट अभी भी बाजारों में ही रुके हुए हैं।
आरबीआई की ताजा रिपोर्ट बता रही है कि प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के नारे को भी कोई सफलता नहीं मिली है, बल्कि पूरे देश में नकद का कारोबार दोगुने से ज्यादा हो गया है। साथ ही 10 लाख करोड़ से ज्यादा लोगों ने अपने घरों में फिर से सुरक्षित कर लिया है। आज के ही दिन 2016 में नोटबंदी लागू की गई थी। 6 माह तक यह कहा गया कि इससे कालाधन तेजी से बाहर आएगा और टैक्स भी बढ़ेगा, परन्तु कालाधन के मामले में कोई उपलब्धि हासिल नहीं हुई। आरबीआई की ताजा रिपोर्ट बता रही है कि 5 साल पहले की गई नोटबंदी का क्या असर हो रहा है। देश में अब 28 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा नकद हो चुका है। नोटप्रेस धड़ल्ले से नोट छापे जा रही है। 5 सालों में नकद का कामकाज अपने पिछले सभी रिकार्ड तोड़ चुका है। त्योहारों में भी डिजिटल लेनदेन से ज्यादा नकद लेनदेन ही होने के आंकड़े सामने आए हैं।

जनधन खातों के आंकड़े भी जारी
रिजर्व बैंक ने 27 अक्टूबर 2021 को जनधन खातों को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी कर दी। इसके अनुसार 29 करोड़ खातों ग्रामीण क्षेत्र में और 14 करोड़ 54 लाख शहरी क्षेत्र में खोले गए हैं। यानी कुल 43 करोड़ 76 लाख खाते खुले, इनमें से 31 करोड़ 67 लाख खातों में एटीएम कार्ड जारी किया गया। इनमें कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपए जमा हुए हैं। इन खातों में भी एटीएम का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

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