खंडवा : ठाकुर बाहुल्य सीट पर शिवराज सिंह की प्रतिष्ठा लगी दांव पर

भाजपा जोबट में भी विद्रोहियों के संकट से निपट नहीं पाएगी

इंदौर। मध्यप्रदेश में खंडवा लोकसभा और तीन विधानसभा उपचुनाव को लेकर आज नामांकन भरने की आखिरी तारीख है। भाजपा में भारी विद्रोह उम्मीदवारों को लेकर दिखाई दे रहा है। कल खंडवा में कई आग्रह के बाद भी स्व. नंदकुमारसिंह चौहान के पुत्र नामांकन भरवाने नहीं पहुंचे। तो वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार राजनारायणसिंह के लिए अरुण यादव और शेरा एक जाजम पर दिखाई दिए। खंडवा लोकसभा सीट जहां मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा की सीट है तो वहीं जोबट में सुलोचना रावत को भाजपा उम्मीदवार बनाने को लेकर भाजपाई भी मैदान में आ गए है। खंडवा लोकसभा में एक लाख क्षत्रीय वोट है। जिसका खामियाजा भाजपा को होगा तो वहीं डेढ़ लाख मुस्लिम वोट भी है जो कतई भाजपा के साथ नहीं जाएंगे। दूसरी ओर यह सीट यदि भाजपा ने जीती तो पूरी तरह से शिवराजसिंह चौहान की मेहनत और कार्यों का नतीजा होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि का इस सीट पर कोई प्रभाव अब नहीं है। भयानक महंगाई, बेरोजगारी का असर हर परिवार पर दिख रहा है।
भाजपा के दिग्गज नेता अगले तीन दिनों में हर विधानसभा में दल में हो रहे विद्रोह को समाप्त करने के लिए मैदान में उतर गए है। सबसे ज्यादा संकट खंडवा लोकसभा पर ही है। यहां पर कांग्रेस के उम्मीदवार राजनारायणसिंह जो अरुण यादव के घोर विरोधी थे वे उम्रदराज नेता है और उनसे कांग्रेस के ही उन नेताओं को कोई संकट नहीं है जो अरुण यादव को लेकर अपने आप को असहज महसूस करते थे। इनमें बाला बच्चन, विजयलक्ष्मी साधौ और रवि जोशी शामिल है। अब सारे नेता पूरी ताकत से राजनारायणसिंह के साथ मैदान में होंगे तो दूसरी ओर अरुण यादव और शेरा भी उनके साथ प्रचार में रहेंगे। यहां विद्रोह की स्थिति नहीं के बराबर है। तो दूसरी ओर खंडवा में ज्ञानेश्वर पाटिल को भाजपा ने मैदान में उतारा है। वे इसके पहले पार्षद का चुनाव ही लड़े है। इसके बाद जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे। दूसरी ओर खंडवा लोकसभा में महाराष्ट्रियन आबादी बहुत ज्यादा नहीं है। यह सीट ठाकुर बहुल सीट मानी जाती है। खंडवा लोकसभा में मुख्यमंत्री अपनी पूरी ताकत लगाने जा रहे है। पिछले उपचुनाव की तरह इस उपचुनाव में भी निगम मंडलों की रेवडी दोनों हाथों से दिए जाने का आश्वासन भी शुरू हो गया है। हालांकि पिछले 27 विधानसभा सीटों के लिए किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए है। भाजपा के कई दिग्गज अभी भी इसी इंतजार में है। दूसरी ओर इस सीट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार का प्रभाव भी अब बेहतर स्थिति में देखने को नहीं है। यदि यह सीट भाजपा जीतती है तो निश्चित रूप से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के कार्यों पर ही आम आदमी की मोहर होगी। दूसरी ओर जोबट में सुलोचना रावत को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। यहां यह दावा किया जा रहा है कि सुलोचना रावत को लाने में इंदौर के विधायक रमेश मेंदोला की बड़ी भूमिका रही है। भाजपा अब केवल 13 तारीख तक नाम वापसी के बाद ही बचे हुए लोगों को लेकर नई रणनीति तैयार करेगी। हालांकि सभी जगहों पर विद्रोहियों ने फार्म भर दिए है।

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