अपहरण, लाखों की चोरियों, चेन लुटेरों का आरामदाह बना बाणगंगा थाना

जहरीली शराब से लेकर अवैध शराब तक के सभी कांड हो चुके हैं इस थाना क्षेत्र में

 

इंदौर। इन दिनों सीएम शिवराजसिंह चौहान के निर्देश पर जहां शहर में एंटी माफिया अभियान में हर तरह के माफिया पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं बढ़ते अपराध को कंट्रोल करने के लिए पुलिस अधिकारियों ने प्रयास करते हुए सभी थाना प्रभारियों को गुंडे-बदमाशों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लगता है कि इन निर्देशों का बाणगंगा थाना क्षेत्र में कोई असर नहीं हो रहा है। यही कारण है कि यह थाना क्षेत्र अपराधों का गढ़ बनता जा रहा है और बाणगंगा पुलिस पर अपराधियों पर नियंत्रण नहीं है।
आए दिन समाचार पत्रों में सबसे अधिक अपराध के मामले में बाणगंगा थाना क्षेत्र की घटनाएं सामने आती है। इस क्षेत्र में हर तरह के अपराध सामने आ रहे हैं। कल भी इस थाना क्षेत्र में जहां व्यापारी के घर से दस लाख रुपए का माल चोरी हो गया, वहीं एक दिल्ली के एक ट्रांसपोर्टर का अपहरण भी सामने आया, जबकि फर्जी दस्तावेज बनाने के मामले में दो और आरोपी पकड़ाए हैं। वहीं क्रिकेट का सट्टा भी यहीं पकड़ाया है। हालांकि चोरी के मामले में पुलिस ने चार आरोपी पकड़े हैं, बताया जाता है कि यह आरोपी भी पुलिस ने नहीं, बल्कि फरियादी ने खुद ही सीसीटीवी कैमरों की मदद से पता लगाकर पुलिस को बताए, तब कहीं जाकर इन्हें पकड़ा गया है। यह तो वह अपराध हैं तो सामने आए हैं। इसके अलावा बाणगंगा की कई बस्तियों में अवैध शराब का व्यवसाय फलफूल रहा है। कभी कभार अधिकारियों की सख्ती पर दिखावे की कार्रवाई की जाती है। सूत्र बताते हैं कि थाना प्रभारी राजेंद्र सोनी का क्षेत्र के गुंडे-बदमाशों और अपराधियों पर नियंत्रण नहीं है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।
आए दिन मारपीट और चाकूबाजी – बाणगंगा इलाके में वसूलीबाजों का भी बोलबाला है। चूंकि सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र है और यहां पर सैकड़ों की संख्या में कारखाने हैं। वसूलीबाज गुंडे आए दिन व्यापारियों को वसूली के लिए परेशान करते हैं और रुपए नहींं देने पर मारपीट की जाती है। वहीं मजदूर वर्ग के लोग जब रात में अपने घर की ओर जाते हैं तो कई बार नशेड़ी उन्हें घेर लेते हैं। इतना ही नहीं चाकूबाजी तो इस थाना क्षेत्र आम बात हो गई है। हर दिन कहीं न कहीं पर चाकूबाजी की घटना हो जाती है। इन सबके पीछे कारण टीआई की कार्यप्रणाली में ढिलाई है। सूत्र बताते हैं कि आम फरियादी जब थाने पहुंचता है तो उस पर ही सख्ती कर दी जाती है, जिससे वह डर जाता है और इसका लाभ अपराधियों को मिल जाता है। कल जिस ट्रंासपोर्टर का अपहरण हुआ था उस मामले में भी पहले तो शिकायत लेने से मना दिया गया था और टीआई से भी ट्रांसपोर्टर के दोस्त मिलने नहीं दिया जा रहा था।
अधिकारियों की सख्ती भी काम नहीं आ रही – शहर में बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सभी थाना प्रभारियों को अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिसका असर दिखने भी लगा है, लेकिन लगता है कि इस क्षेत्र में अधिकारियों की सख्ती का भी असर नहीं हो रहा है। इसके पीछे प्रमुख कारण टीआई सोनी की कार्यप्रणाली ही है।

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