अफगानिस्तान में भुखमरी के हालात, डेढ़ करोड़ के पास खाने का संकट

कई क्षेत्रों में लूटपाट और हत्याओं का दौर जारी, फिलहाल मदद की संभावना नहीं

काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से ही मुल्क में संकट का दौर शुरू हो गया है. लेकिन एक संकट ऐसा भी है जो तालिबान के कब्जे से पहले से ही था और अब यह और गहराता जा रहा है. डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों के सामने अब खाने का संकट खड़ा हो गया है। विदेशों से आ रही मदद भी बंद हो गई है। कई जगह लूटपाट की घटनाएं हो रही है।
दरअसल, अफगानिस्तान में लोगों के सामने खाने का संकट खड़ा होता दिख रहा है. हालात भुखमरी जैसे हो चले हैं. यूएन फूड एजेंसी के मुताबिक उसने तालिबान से समझौता कर अफगानिस्तान के एक राज्य में खाने की डिलवरी शुरू कर दी है लेकिन तीन प्रांतीय राज्य अब भी ऐसे हैं जहां खाने की सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है।
रोम, स्थिति वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के कार्यालय के मुताबिक 39 मिलियन लोगों वाले इस देश के 14 मिलियन लोगों के सामने खाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. अफगानिस्तान में तीन सालों में यह दूसरी बार सूखे जैसे हालात हैं. तालिबान के कब्जे से पहले भी सूखे जैसे हालात थे। उन्होंने बताया कि कंधार, हेरात, जलालाबाद में हालात ऐसे नहीं है कि इन इलाकों में यूएन एजेंसी खाने की सप्लाई जारी रख सके. डब्ल्यूपीएफ के आंकड़ों के मुताबिक अफगानिस्तान में लगभग 2 मिलियन बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।
ब्रिटेन तालिबान के साथ समन्वय को तैयार
लंदन। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने तालिबान को लेकर एक एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ने पर ब्रिटेन तालिबान के साथ भी काम करने को तैयार है। अफगानिस्तान मसले का कोई स्थाई समाधान निकले। ब्रिटेन अफगानिस्तान में कई दिनों से बड़े स्तर पर अपने लोगों को वापस लाने के लिए अभियान चला रहा है। इस बारे में जॉनसन ने कहा कि अब एयरपोर्ट पर स्थिति सुधर रही है। बीते दिन हम हजार लोगों को बाहर निकाल पाए थे। कई लोगों का हम एआरएपी के तहत भी रेस्क्यू कर रहे हैं। कई ऐसे अधिकारी भी मौजूद हैं जिन्होंने ब्रिटेन के लिए काफी कुछ किया है, ऐसे में उनकी मदद करना हमारा दायित्व है। आने वाले दिनों में हम और तेजी से काम करने वाले हैं। अमेरिका के फाइटर जेट लगातार काबुल एयरपोर्ट पर दिखाई दे रहे हैं। वहां की सेना बता रही है कि 7000 से ज्यादा लोगों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है।
अफगान सेना और तालिबान के
बीच समझौता वार्ता की तैयारी
काबुल। तालिबान और नॉर्दर्न अलायंस के बीच सत्ता में साझेदारी का समझौता हो सकता है। दोनों समूहों के प्रतिनिधियों के बीच इस संबंध में वार्ता शुरू हो गई है। पंजशीर घाटी के जशीर में नॉर्दर्न अलायंस के सरदार अहमद मसूद और तालिबान के वार्ताकारों के बीच बातचीत चल रही है। दोनों गुटों के बीच समझौता होने की संभावना जताई जा रही है। दरअसल मूसद गुट के साथ जुड़े पूर्व अफगान उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़कर भागने के बाद खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया था। सूत्रों का कहना है कि सालेह इस बातचीत के जरिये अफगान सत्ता में साझेदारी हासिल करने की कोशिश में हैं। उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में सत्ता हस्तांतरण के लिए पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई की अध्यक्षता वाली काउंसिल नई सरकार का खाका तैयार करने के लिए सभी गुटों से बातचीत कर रही है। करजई की इसी काउंसिल में नॉर्दर्न अलायंस से जुड़े रहे अफगानिस्तान के पूर्व चीफ एग्जीक्यूटिव और तालिबान के साथ वार्ता कर चुकी टीम के मुखिया रहे अब्दुल्ला अब्दुल्ला भी शामिल हैं। एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी रविवार को काबुल दौरे पर जाएंगे और नई सरकार के गठन को लेकर चर्चा करेंगे।

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