प्रदेश में इंदौर के बंगाली ब्रिज को लेकर नहीं है सक्षम इंजीनियर, अब आईआईटी मुंबई से मांगी सलाह

भोपाल में ८३ मीटर लंबा स्पान बन रहा इंदौर में ३६ मीटर में विवाद

 

इंदौर। बंगाली चौराहे पर निर्माणाधीन ब्रिज को लेकर जो तकनीक$ीत्रुटि सामने आई है उसके लिये अब आईआईटी मुंबई से निराकरण किया जायेगा। यह समझ नहीं आ रहा कि क्या मध्यप्रदेश में इस त्रुटि के निराकरण के लिये सक्षम इंजिनियर मौजूद नहीं है। दूसरी ओर भोपाल के हबीबगंज रेलवे क्रासिंग पर बन रहे ब्रिजके लिये 83 मीटर लंबा स्पान बनाया जा रहा है। दूसरी ओर बंगाली चौराहे पर 36 मीटर लंबे स्पान को लेकर चिंतन चल रहा है। इधर अधिकारी अपनी गलती को छुपाने के लिये भीड भरे चौराहे के बीच दो पिलर बनाने के लिये अडे हुए है। सर्वे के बाद अब बंगाली चौराहे के स्कूल को लेकर मुंबई से विशेषज्ञों की राय आयेगी।
लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित किये जा रहे इस निर्माणाधीन ब्रिज को लेकर कई तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं। 29 करोड की लागत से बन रहे 576 मीटर लंबे फ्लाय ओवर में आई तकनीकी खामी को दूर करने के लिए 8 करोड़ रुपए से ज्यादा अतिरिक्त खर्च होगा। अब दूसरी ओर 36 मीटर के स्पॉन को लेकर सर्वे से लेकर सारे प्रयोग किए जा रहे है। जबकि चौराहे पर यातायात का भारी दबाव होने के कारण मध्य में दो पिलर बनाए जाने से इसका असर यातायात पर भी दिखाई देगा। यातायात सुगम रहे इसके लिए भले ही 8 करोड़ रुपए ज्यादा लगे परंतु 36 मीटर के स्पॉन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि इसी मध्यप्रदेश के भोपाल में 83 मीटर लंबा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण हो रहा है जिसके नीचे से ट्रेन गुजरेगी और ऊपर से मेट्रो। इसके लिए 83 मीटर लंबा स्पॉन बनाया जा रहा है और इस स्पॉन की तकनीकी डिजाइन मध्यप्रदेश में ही की गई। फिर ऐसे में इंदौर के बंगाली चौराहे के ब्रिज के 36 मीटर स्पॉन को लेकर मुंबई आईआईटी से निराकरण कराए जाने हेतु सलाह ली जा रही है। यह इस बात का घोतक है कि मध्यप्रदेश की सरकार के पास तकनीकी रूप से अच्छे इंजीनियरों की बेहद कमी है जो इस प्रकार के निर्माणों में अपनी भूमिका निभा पाए। शहरहित में बहुत जरूरी है कि 36 मीटर के स्पॉन को लेकर ही इसका निराकरण किया जाए। दूसरी ओर इंदौर के माने हुए इंजीनियर अतुल सेठ ने भी इस मामले में अपनी राय देते हुए कहा है कि यदि सड़क के बीच पिलर बनाए गए तो इसका असर आने वाले सालों में दिखाई देगा और इसकी कोई भरपाई नहीं हो पाएगी।

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