सुलेमानी चाय- मोर्चे का जुलूस ..जुलाहों में ल_म ल_ा…दिल के अरमां आंसुओं में बह गए…

मोर्चे का जुलूस …

भारतीय जनता पार्टी में अल्पसंख्यक मोर्चे की क्या अहमियत है, ये तो मोर्चे के सदस्य ही बेहतर जानते है, लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक मोर्चे की मेहनत काबिले तारीफ रही। सोशल मीडिया पर तो मानो इंदौर की नौ की नौ सीट पर मोर्चे की मेहनत से ही कमल खिला, मैदानी मेहनत का तो हाल ही मत पूछिए। वैसे एक नया काम सोशल मीडिया पर जरूर हुआ जब चारो तरफ से चुनाव में मोर्चे का जुलूस निकाला जा रहा था तो मोर्चे के नगर अध्यक्ष अपने बिना आग के शोले के साथ फेसबुक पर पुरानी मीटिंग के फोटू जो कि एजाज खान के इंदौर आने पर डाले थे वही फोटो कैप्शन बदल कर विधानसभा में अल्पसंख्यक मोर्चे की मीटिंग के साथ डाले गए शायद महोदय जनता को जरूरत से ज्यादा बेवकूफ समझ रहे है, लेकिन पब्लिक है सब जानती है। वैसे अब बीजेपी भी जल्द से जल्द मोर्चे का जुलूस निकालने के चक्कर मे है।

जुलाहों में ल_म ल_ा…

इंदौर में इस विधानसभा चुनाव में बड़ी पार्टियो में तो अपनी जगह गुटबाजी चल ही रही थी, वही दूसरी तरफ इंदौर पांच ओर एक में चुनाव लड़ रही आवैसी की पार्टी में भी गुट बाजी दिखी। जहां एक तरफ दोनो उम्मीदवारो की गाड़ी में इंदौर के नेताओ लिए कोई जगह नही थी, वही प्रदेश कौर कमेटी भी उम्मीदवारों से नई नवेली दुल्हन की तरह नाराज दिखी कौर कमेटी के एक मेम्बर ने तो मतगड़ना के लिए निर्दलीय उम्मीदवार से पास बनवाया वही कौर कमेटी की नाराजगी के चलते दोनों उम्मीदवारो के लिए पार्टी से आवैसी की तरफ कोई वीडियो भी जारी नही हुवा। तो भैय्या दोनों पर ये कहावत सटीक बैठती है, ना सुत न कपास जुलाहों में ल_म ल_ा।।

दिल के अरमां आंसुओं में बह गए…

इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी जहा अपनी सरकार बनने को लेकर आश्वस्त थे । वही ज्यातर नेताओं के सपने मे तो कमलनाथ की सवारी तक आने लगी थी और कई अल्पसंख्यक नेताओं ने तो अपनी प्लेटे भी तैयार करवा ली थी। लेकिन बेचारे अपने अरमानो की थाली के साथ प्लेट भी घर ले आए। अब बेचारे उन प्लेटो में बढ़िया पोहा जलेबी सूत रहे है और सारा इल्जाम बेचारी ईवीएम को दे रहे है।

सुलेमानी खीचड़ा…

राऊ में भजापा से फुदक कर जीतू पटवारी के सिपहसलार बने फुदकीमार नेता के जन्मदिन पर महफूज़ पठान ने सभी दलों की सामूहिक खिचड़ी तैयार कर सभी के लिए खीचड़े की दावत रखी, जिसमे कांग्रेस और भजापा के कई नेताओं ने जीत ओर हार का गम भुला कर इस दावत में एक दूसरे को गले लगाया नफरतों के दौर में ऐसी कोशिशें काबिले तारीफ है, जिसके लिए इरफान मंसूरी ओर महफूज़ पठान सुलेमानी सलाम के हक़दार है।

 

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