वाह मोदी जी वाह… भाजपा में करो तो रासलीला, विपक्ष में हो तो कैरेक्टर ढीला…

स ब सबकुछ जानने से पहले प्रधानमंत्री के उस वक्तव्य को समझ लेना बहुत जरूरी है जो नई राजनीति को लेकर बहुत कुछ संदेश दे रहा है। यह उद्बोधन उन्होंने भोपाल में पिछले दिनों देते हुए कहा था कि अगर ‘उनकी घोटाले की ग्यारंटी है तो मोदी की भी ग्यारंटी है हर घोटालेबाज पर कार्यवाही की, ग्यारंटी देश को लूटने वालों पर कार्रवाई की ग्यारंटी उनका हिसाब होकर रहेगाÓ.. बात करूं एनसीपी की तो 70 हजार करोड़ के घोटाले में फंसी हुई है। प्रधानमंत्री के हिसाब करने का तरीका देश में नए लोकतंत्र में आस्था और राजनीति में नैतिकता और सूचिता की नई परिभाषा और मिसाल बनने जा रहा है। महाराष्ट्र में कल बड़ी उथल-पुथल के बाद यह किसी प्रदेश में दो बार दल बदल करवाकर सरकार बनाने का सबसे बड़ा मामला बन गया है। यहां अजीत पंवार जो चौथी बार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे हैं इसके पूर्व भी वे तड़के 4 बजे राज्यपाल के निवास पर जाकर उपमुख्यमंत्री पद की अकेले शपथ ले चुके हैं। यूं तो राजनेता पद और गोपनीयता की शपथ लेते हैं। देश में पहली बार किसी उपमुख्यमंत्री ने गोपनीय तरीके से पद और गोपनीयता की शपथ लेने का नया रेकार्ड भी इसी सरकार के साथ बनाया था। अब प्रधानमंत्री जिन्हें भ्रष्ट बताकर अभी तक सीना ठोंककर बोल रहे थे कि घोटालेबाजों का हिसाब होकर रहेगा। कल भाजपा के साथ एनसीपी के जिन तीन मंत्रियों ने शपथ ली और 30 विधायक जो नई सरकार में शामिल हो गए.. इनमें से एक मंत्री 870 करोड़ की रिश्वत के मामले में दो साल जेल रहकर बाहर आए हैं इनका नाम छगन भुजबल हंै.. दूसरे मंत्री हसन अली भी 40 हजार किसानों के 10-10 हजार रुपए सरकारी सहायता के हड़प करने के मामले में भी ईडी ने मनी लांड्रिंग में उन्हें नोटिस दे रखा है। यह पिछले दिनों भाजपा के खिलाफ सद्भावना यात्रा में प्रधानमंत्री को झूठा और चोर बता रहे थे.. इसके अलावा एनसीपी के 8 और विधायक जिन्हें जेल जाना चाहिए था वे अब सरकार के दामाद बन गए हैं। यह पहला मामला नहीं है, इसके पहले मणिपुर चुनाव में भी खुद गृहमंत्री ने मुख्यमंत्री वीरेन्द्र सिंह को भ्रष्ट बताते हुए यह दावा किया था कि भाजपा की सरकार बनने के बाद यह जेल में दिखेंगे। अब उन्हीं के साथ सरकार में शामिल होकर देश को संदेश दे रहे हैं और इसी का परिणाम है कि 100 से अधिक मौतों के बाद भी मणिपुर पर प्रधानमंत्री की आवाज नहीं निकल रही है। देश में इस नए लोकतंत्र में जो चरित्र समाज के सामने आ रहा है वह लोकतंत्र में नैतिकता और सूचिता की राजनीति का दावा करने वाले भाजपा के नए संस्कारों से देश को परिचित करवा रहा है। भारतीय राजनीति में जो भाजपा सूचिता और संस्कार को लेकर अपनी पहचान बना रही थी अब वह सत्ता को हथियाने के लिए चरित्रहीन क्यों हो रही है, क्या उसे अपने कार्यकर्ताओं पर और उनकी क्षमता पर भरोसा नहीं रहा कि उसे अब जोड़-तोड़ की सरकारों के साथ ही सत्ता पर बने रहने के लिए नई संस्कृति का भाजपा और कार्यकर्ता से परिचय करवाना पड़ रहा है। इसके साथ ही अब यह भी मान लिया जाए कि करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार में ईडी, सीबीआई और आयकर की कार्रवाई के बाद यदि राजनेता भाजपा की पूंछ पकड़कर चल पड़ता है तो वह अपनी बेतरणी पार लगा ही लेगा। भाजपा की नई सूचिता और संस्कार में अब कुछ इस तरह परिभाषित किया जा सकेगा कि भाजपा में करो तो रासलीला, विपक्ष में किया तो कैरेक्टर ढीला…

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